पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू।
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जवाहर लाल नेहरू 1951 से 1962 के आम चुनाव तक देश के सबसे लोकप्रिय नेता थे। उनको जनता का प्यार इस कदर हासिल था कि कांग्रेस के सामने कोई पार्टी चुनौती नहीं खड़ी कर सकी। हालांकि उस समय श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जेबी कृपलानी और राम मनोहर लोहिया जैसे दिग्गज नेता उनके घोर आलोचक थे, लेकिन वे भी ज्यादा समर्थन हासिल नहीं कर पाए। पहली लोकसभा की 489 सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस ने सर्वाधिक 364 सीटें जीतीं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 और जनसंघ मात्र तीन सीटें जीतकर संघर्ष करती दिखीं।
देश में प्रथम आम चुनाव में लोकसभा की 499 में से 489 सीटों के लिए चुनाव हुआ। उस समय संसद के निचले सदन के साथ अधिकांश विधान सभाओं के भी चुनाव हुए। पहले आम चुनाव में कांग्रेस ने 364 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। उसे कुल 44.99 प्रतिशत वोट हासिल हुए। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को सिर्फ 16 सीटों पर जीत मिली। उसका वोट प्रतिशत 3.29 था। सोशलिस्ट पार्टी का वोट 10.59 प्रतिशत रहने के बावजूद उसे सिर्फ 12 सीटें ही मिल पाईं। 68 चरणों में हुए चुनाव में कुल 53 पार्टी और 533 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे।
भारतीय जनसंघ को तीन सीटें ही मिल सकीं। उसका वोट प्रतिशत 3.06 रहा। दूसरा आम चुनाव 1957 में हुआ। इस चुनाव में कुल 494 में से बहुमत के लिए 248 सीटें जीतना जरूरी था। कांग्रेस का इस बार भी प्रदर्शन शानदार रहा। उसने पिछले चुनाव की तुलना में 7 सीटें ज्यादा जीतीं। पार्टी को 371 सीटें मिलीं। वोटों का प्रतिशत 47.78 रहा। इस बार कांग्रेस का वोट प्रतिशत 2.79 बढ़ा। मुख्य प्रतिद्वंद्वी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अमृत डांगे के नेतृत्व में 27 सीटें जीतीं। भाकपा ने पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार 11 सीटें ज्यादा जीतीं। उसका वोट प्रतिशत 5.63 से बढ़कर 8.92 हो गया। वहीं, भारतीय जनसंघ ने इस बार एक सीट ज्यादा हासिल की। उसने 4 सीटों पर विजय प्राप्त की। उसका वोट प्रतिशत बढ़कर 5.97 हो गया।
तीसरे चुनाव में भी कायम रहा जलवा
नेहरू की धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की विचारधारा का ही असर था कि कांग्रेस का जलवा तीसरे लोकसभा चुनाव में भी कायम रहा। 1962 में कुल 508 सीटों में से 494 सीटों के लिए 19 से 25 फरवरी के बीच चुनाव हुआ। बहुमत के लिए 248 सीटें जरूरी थीं। नेहरू के नेतृत्व में पार्टी ने 361 सीटों पर कब्जा जमाया। कांग्रेस को इस बार 10 सीटों का नुकसान हुआ।