थाना सिकंदरा में मौजूद मृतक के परिजन।
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आगरा के थाना सिकंदरा क्षेत्र के कीठम स्थित आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज में चल रही अग्निवीर भर्ती में बृहस्पतिवार को शामिल होने आए जालौन निवासी 22 वर्षीय निशांत यादव की मौत हो गई। वह भर्ती में लंबाई कम होने की वजह से बाहर हो गया था। हाईवे पर खड़ी बस में चढ़ रहा था। तभी उसे हाईटेंशन लाइन से करंट लग गया। बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
बृहस्पतिवार को जालौन और इटावा के युवाओं की भर्ती थी। सुबह से ही युवाओं का आना शुरू हो गया था। जालौन की कोंच तहसील से 60-65 युवा एक ही बस से आए थे। कोंच के जयप्रकाश नगर निवासी निशांत यादव अपने 15 साथियों के साथ आया था। उसके साथ गांव के ही दोस्त सुमित, शिवम और निमित यादव भी थे। निमित ने बताया कि रात तकरीबन 1:30 बजे भर्ती में दस्तावेज सत्यापन के बाद लंबाई मापी गई। उसकी और निशांत की लंबाई कम थी। दोनों बाहर आ गए।
आनंद इंजीनियरिंग कालेज से डेढ़ किलोमीटर दूरी पर एक होटल के बाहर उनकी बस खड़ी हुई थी। भर्ती में आगे की प्रक्रिया से बाहर होने के बाद युवा बस के अंदर और छत पर सो रहे थे। निशांत भी बस की छत पर चढ़ा। इसी दौरान पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से उसका हाथ छू गया, जिससे करंट लगा। वह वहीं गिर पड़ा। चीखपुकार सुनकर अन्य युवक जाग गए। वो निशांत को उठाकर भर्ती स्थल पर खड़ी एंबुलेंस से एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी ले गए, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
बेटे की मौत के साथ टूट गया पिता का सपना
निशांत बीए पास था। उसके पिता कमल सिंह यादव किसान हैं। मृतक का भाई प्रशांत बेरोजगार है। प्रशांत ने बताया कि पिता को उम्मीद थी कि निशांत का सेना में चयन हो जाएगा। वह दो साल से तैयारी में भी लगा हुआ था। रोजाना साथियों के साथ दौड़ लगाने जाता। घर से निकला था तो मां ज्योति को भी उसके भर्ती होने की उम्मीद थी। मगर, सुबह जब साथियों ने बताया कि वह हादसे का शिकार हो गया है तो परिजन के पैरों तले जमीन खिसक गई। प्रशांत रिश्तेदारों के साथ पहुंच गया। थाने में वह रोये जा रहा था। शाम को पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव गांव ले गए।
दोस्त की मौत से गमजदा हैं सुमित, शिवम और निमित
निशांत अपने दोस्त सुमित, शिवम और निमित के साथ आया था। निशांत की मौत के बाद दोस्त गम में डूबे हुए हैं। निमित भी लंबाई की वजह से चयनित नहीं हो पाया था। वहीं शिवम और सुमित दौड़ में बाहर हो गए थे। इसके बाद बस के अंदर सो रहे थे। रात में शोर सुनकर बस से बाहर आए थे। उन्हें जब पता चला कि निशांत के साथ हादसा हुआ है, वह उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। मगर, उसे बचाया नहीं जा सका।