12एमएनपी-09-करहल रोड जैन मंदिर में जानकारी देते जैन मुनि विशोक सागर
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मैनपुरी। आज सभी जाति और धर्म की बात करते हैं, लेकिन मानव का सबसे बड़ा धर्म जीव रक्षा है। हम सभी को जीव की रक्षा करनी चाहिए। यह बात आचार्यश्री विशोक सागरजी महाराज ने शहर स्थित बड़ा जैन मंदिर में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।
आचार्यश्री ने कहा कि अहिंसा भगवान महावीर की मूल शिक्षा है। तुलसीदास ने भी दया के बारे में कहा है। प्रत्येक जाति धर्म के व्यक्ति को इस पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज हित में सभी को अनावश्यक वस्तुओं को त्याग करना चाहिए। ऐसा करने से आपके लिए गैरजरूरी चीजें, जरूरतमंदों के काम आ सकती हैं।
आचार्यश्री ने बताया कि 13 से 17 नवंबर तक चातुर्मास निष्ठापन एवं भव्य पिच्छी परिवर्तन समारोह मनाया जाएगा। 13 नवंबर को धन्य तेरस पर जैन मंदिर में सुबह पांच बजे खजाना वितरण होगा। 15 नवंबर को प्रात: नौ बजे से भगवान महावीर निर्वाण लाड़ू महोत्सव एवं चातुर्मास निष्ठापन कार्यक्रम होगा। दोपहर तीन बजे आरती होगी। 16 नवंबर दोपहर 12 बजे से जैन मंदिर बिसातखाना में भगवान महावीर विधान आयोजित किया जाएगा।
वहीं 17 नवंबर को बड़ा जैन मंदिर में पिच्छी परिवर्तन समारोह होगा।
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‘धनतेरस नहीं धन्य तेरस मनाएं’
आचार्यश्री ने कहा कि जैन आगम में धनतेरस को ‘धन्य तेरस’ या ‘ध्यान तेरस’ कहा गया है। भगवान महावीर स्वामी इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिए योग निरोध के लिए चले गए थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुए भगवान महावीर ने दीपावली के दिन निर्वाण प्राप्त किया। इसके बाद से ही यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ। लोगों को धनतेरस की जगह धन्य तेरस मनाना चाहिए।