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कोरोना काल में जेल रेडियो ने दूर किया बंदियों का अकेलापन, गाए जाते हैं फरमाइशी गीत

Fri, 31 Jul 2020 02:28 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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रेडियो - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना काल में बंदियों की मुलाकात बंद है। बंदियों से अपने नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में बंदियों का अकेलापन दूर करने में जेल रेडियो काफी कारगर साबित हुआ। जेल रेडियो के माध्यम से गीत, कविताओं ने बंदियों को एक मंच दिया, जहां वो खुद को तनाव मुक्त कर सकते थे। 

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31 जुलाई 2019 को आगरा की जिला जेल में रेडियो स्टेशन का शुभारंभ एसएसपी बबलू कुमार और तिनका तिनका संस्था की संस्थापिका वर्तिका नंदा ने किया था। जेल के मुख्य गेट के पास कमरे में रेडियो स्टेशन स्थापित किया गया था। उस समय आईआईएम बेंगलुरु से स्नातक महिला बंदी और स्नातकोत्तर पुरुष बंदी को रेडियो जॉकी बनाया गया। 


25 मार्च से कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से रोकने के लिए बंदियों की मुलाकात बंद हैं। इस दौरान जेल रेडियो ने बंदियों का अकेलापन दूर किया। उन्हें अवसाद और तनाव से बचाया। सभी बंदियों की आवाज बन गया। जिला जेल में इस समय 2500 बंदी हैं। इनमें 150 महिलाएं और 17 बच्चे भी हैं। 

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रोजाना एक घंटे गुनगुनाते हैं बंदी 


जिला जेल के अधीक्षक शशिकांत मिश्र ने बताया कि जेल रेडियो पर हर रोज दोपहर तीन से चार बजे गाना, कविता सुनाई जाती हैं। इसके अलावा बंदियों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के बारे में बताया जाता है। 

पुरुष बंदियों के अलावा महिला बंदी भी रेडियो पर अपने गीत गाने के लिए आगे आ रही हैं। 304 फरमाइशी गाने गाए जाते हैं। लॉकडाउन के दौरान मुलाकात बंद होने के दौरान रेडियो ने अहम भूमिका निभाई। 

प्रदेश की 23 जेलों में है रेडियो

तिनका तिनका संस्था की वर्तिका नंदा ने इस मुहिम को तिनका-तिनका मॉडयूल ऑफ प्रिजन रिफार्म नाम दिया है। वो उत्तर प्रदेश की जेलों में स्टडी कर रही हैं। बंदियों की जरूरतों के बारे में जान रही हैं। उन्होंने आगरा जिला जेल को मॉडल बनाया। प्रदेश की पांच सेंट्रल जेल और 18 जिला जेल में रेडियो है।
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