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UP News: भारत की सबसे पुरानी जेल में जेल रेडियो ने बदल दी कैदियों की जिंदगी, प्रेरणा और समर्थन का बना स्रोत

Wed, 31 Jul 2024 12:47 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा जिला जेल में जेल रेडियो शुरू किया गया। इसके शुरू होने से कोविड-19 के दौरान कैदियों को विशेष रूप से बड़ी मदद मिली। इससे प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश ने अन्य जेलों में भी जेल रेडियो शुरू करने का निर्णय लिया। कैदियों का चयन और प्रशिक्षण जेल सुधारक वार्तिका नंदा द्वारा किया गया। जल्द ही कैदियों के नए बैच का चयन और प्रशिक्षण शुरू होगा। 
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आगरा जिला जेल में जेल रेडियो का शुभारंभ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तारीख थी 31 जुलाई और वर्ष 2019, स्थान आगरा जिला जेल। यानी आज से ठीक पांच वर्ष पूर्व की बात है। भारत की इस सबसे पुरानी जेल में कैदियों के जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा था। एसएसपी बब्लू कुमार और जेल अधीक्षक शशिकांत मिश्रा की मौजूदगी में तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ वर्तिका नंदा ने यहां पर जेल रेडियो का शुभारंभ किया। 

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देखते ही देखते यह रेडियो कैदियों की जीवनरेखा बन गया। इसे कैदी ही चलाते थे। कैदियों द्वारा कैदियों के लिए चलाया जाने वाला जेल रेडियो भारत में एक नई अवधारणा बनकर उभरा। कोविड महामारी के दौरान जब सब लोग घरों में कैद हो गए। किसी से कोई मुलाकात नहीं होती। उस एकाकी पड़ चुके जीवन में यह रेडियो कैदियों के लिए अवसाद से उभरने का अहम किरदार बना।   

ये बने सबसे पहले रेडियो जॉकी

मीडिया शिक्षक और जेल सुधारक डॉ. वार्तिका नंदा का जेल रेडियो का आइडिया कैदियों के जीवन में प्रेरणा और समर्थन का स्रोत बनकर उभरा। जब इसे लांच किया गया तो महिला कैदी तुहिना और पुरुष कैदी उदय को पहला रेडियो जॉकी बनाया गया। तुहिना वह महिला कैदी थीं, जिन्होंने आईआईएम बैंगलौर सो स्नातक किया था। वहीं उदय, परास्नातक पास थे। कैदी अपनी स्क्रिप्ट खुद तैयार करते थे। तुहिना यूपी की जेलों में रेडियो जॉकी बनने वालीं पहली महिला थीं। इसके बाद इनकी टीम में एक और कैदी रजत जुड़ गए।   

आगरा की जिला जेल में हर दिन दो घंटे जेल रेडियो चलता है। अब इसका समय बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही नए कैदियों के एक और सेट को रेडियो जॉकी के रूप में  तैयार किया जाएगा। यह भी तय़ किया गया है। 
 

जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि, 'वर्तमान में जेल रेडियो हर दिन लगभग दो घंटे चलता है। हम समय बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। अगले दौर के चयन से इस कार्य के लिए कैदियों की संख्या बढ़ाने की भी योजना बना रहे हैं।'
 

ICSSR ने इसे माना उत्कृष्ट

तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक वर्तिका नंदा ने बताया कि, 'इस जेल रेडियो की सफलता ने हमें हरियाणा की जेलों और जिला जेल, देहरादून उत्तराखंड में जेल रेडियो को स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। ये रेडियो तिनका मॉडल ऑफ प्रिज़न रेडियो पर आधारित हैं। ये भारतीय जेलों के एकमात्र व्यवस्थित जेल रेडियो हैं। यह गर्व की बात है कि उत्तर प्रदेश की जेलों पर किए गए शोद में यह जिला जेल, आगरा प्रमुख रही। इसे  2019-20 की अवधि के दौरान किया गया था। ICSSR द्वारा इस काम को उत्कृष्ट माना गया। हम इस शोध के निष्कर्षों को जल्द ही सार्वजनिक करेंगे।'

1741 ईस्वी में बनाई गई थी यह जेल

बताते चलें कि आगरा जिला जेल भवन 12वें मुगल सम्राट मोहम्मद शाह गाजी के शासनकाल के दौरान 1741 ईस्वी (हिजरी 1154) में मीर वज़ीर-उद-दीन खान मुख्ताब और मीर जलाल-उद-दीन द्वारा हज जाने वाले तीर्थयात्रियों के विश्राम के लिए बनाया गया था। समय के साथ इस परिसर का उपयोग जेल के रूप में किया जाने लगा। स्थापना के समय जिला जेल, आगरा की क्षमता 706 कैदियों को रखने की थी। इसे बाद में बढ़ाकर 1015 कर दिया गया। 
 

जेल रेडियो और अनुसंधान

वर्तिका नंदा के भारतीय जेलों में महिला कैदियों और उनके बच्चों की स्थिति और उनके संचार की जरूरतों का अध्ययन (विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के संदर्भ में) पर हालिया शोध को ICSSR द्वारा उत्कृष्ट के रूप में मूल्यांकित किया गया है। उन्होंने हरियाणा की जेलों और जिला जेल, देहरादून में जेल रेडियो स्थापित किए हैं। 
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नंदा, दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में पत्रकारिता विभाग की प्रमुख हैं। तिनका तिनका जेलों में सृजन और बेहतर कामों को प्रोत्साहित करने की उनकी मुहिम है। जेलों पर लिखी उनकी किताबें भारतीय जेलों पर प्रामाणिक दस्तावेज मानी जाती हैं। हाल में उनकी लिखी किताब 'तिनका तिनका तिहाड़' ने 12 वर्ष पूरे गए। 
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