आगरा के जगनेर के गांव नौनी में महिला की आत्महत्या के मामले में तीन दिन बाद भी मुकदमे में पुलिसकर्मियों के नाम बढ़े न नामजदों की गिरफ्तारी हुई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि चौकी के दरोगा के कहने पर पुलिसकर्मियों ने गुर्गे से फोन करा रकम मांगी थी। मनोज के एनकाउंटर में मारे जाने के बारे में बताया था। लेकिन, मुकदमे में तहरीर बदलवा कर सिर्फ गुर्गों के नाम लिखवाए गए।
मनोज का परिवार काफी गरीब है। वह मलपुरा स्थित एक कोल्ड स्टोर में काम करते हैं। माता-पिता की मौत हो चुकी है। चाचा के साथ रहते हैं। पत्नी की मौत हो गई। दो बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी मनोज पर हैं। उधर, बृहस्पतिवार को भी मनोज के घर पर लोगों का आना जाना लगा रहा। लोग पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं।
- चौकी में थर्ड डिग्री दी गई थी। चौकी के तीन सिपाही और दरोगा निलंबित हुए। फिर नाम क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे?
- पीड़ित कह रहा है कि चौकी में दो लाख रुपये की मांग के लिए सिपाहियों ने फोन कराया? फिर आरोपी क्यों नहीं?
- मनोज का पहले से कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तो फिर पुलिस ने क्यों उठाया? उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ क्या?
बुधवार को एक संगठन के पदाधिकारियों का मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उन्होंने कहा था कि पीड़ित परिवार से मिलकर प्रदर्शन करेंगे। इसकी जानकारी पुलिस को हो गई थी। बृहस्पतिवार को संगठन के पदाधिकारी नहीं पहुंचे। चर्चा रही कि पुलिस ने संगठन के पदाधिकारियों पर दबाव बनाया। इसके बाद कोई नहीं आया।