कीठम झील में हजारों मछलियों के मरने के बाद बरेली स्थित इंस्टीट्यूट में भेजा सैंपल
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ओखला बैराज से 21 मार्च को आगरा कैनाल में छोड़े गए पानी में ही ऐसा जहर घुला जो कीठम झील की हजारों मछलियों के लिए जानलेवा साबित हुआ। पानी की जांच के लिए सैंपल उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई), इज्जत नगर, बरेली भेजे गए हैं। बुधवार को सूर सरोवर पक्षी विहार के कर्मचारियों ने कीठम झील से मरी हुई मछलियों को बाहर निकाला। बता दें कि मथुरा रिफाइनरी को इसी कीठम झील से पानी सप्लाई होता है।
पानी की जांच में डिसोल्व ऑक्सीजन यानी पानी में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा तय मानक से ज्यादा आई है। आक्सीजन की कमी कीठम झील के पानी में नहीं मिली, इसलिए विस्तृत जांच के लिए सैंपल भेजे गए हैं। वहीं, प्रदूषण के कारण मरी मछलियों से कीठम क्षेत्र में बदबू फैलने लगी। पक्षी विहार के कर्मचारियों ने दिन भर मरी मछलियों को बाहर निकाला। इन्हें बाहर मिट्टी में गड्ढा खोदकर दबा दिया गया। झील में इस समय 22 फीट पानी है। 21 मार्च को ही ओखला बैराज से सिंचाई विभाग ने पानी छोड़ा है। आमतौर पर कीठम झील में 18 फीट तक ही पानी रहता है, लेकिन इस बार चार फीट ज्यादा पानी से न केवल पक्षियों, बल्कि प्रदूषण से पूरे झील का ईको सिस्टम बिगड़ने की आशंका है।
‘कीठम के सैंपल में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा मानक से ज्यादा है। विस्तृत जांच के लिए बरेली आईवीआरआई को सैंपल भेजा गया है। कैनाल से ज्यादा प्रदूषण आने के कारण मछलियों के मरने की घटना हुई है।’ रामकरन, क्षेत्रीय अधिकारी, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
हाई एसिडिक है आगरा कैनाल का पानी
आगरा। 163 किमी लंबी आगरा कैनाल का पानी हाई एसिडिक है। कैनाल के पानी की कई बार जांच हो चुकी है, जिसमें इसे न तो पीने योग्य, न सिंचाई योग्य और न ही बिल्डिंग निर्माण लायक माना गया। इसमें अमोनिया, निकेल और लेड की मात्रा भी बेहद ज्यादा है और एल्ड्रिन, डेल्ड्रिन, एंडोसल्फान, डीडीटी जैसे कीटनाशक ज्यादा मात्रा में मौजूद हैं। दिल्ली के 25 नालों का 3600 एमएलडी सीवर ओखला बैराज में गिरता है, वहां से आगरा कैनाल में पहले ही भारी प्रदूषण आता है। इसके बाद फरीदाबाद में फैक्ट्रियों से निकले रसायन आगरा कैनाल के पानी को और घातक बना देते हैं।