प्रदेश सरकार ने आईटी पार्क योजना की अड़चनें दूर कर दी हैं। भारत सरकार की संस्था साफ्टवेयर टेक्नालॉजी पार्क्स आफ इंडिया (एसटीपीआई) पार्क का निर्माण करेगी। आगरा विकास प्राधिकरण ने शास्त्रीपुरम में पार्क के लिए दो एकड़ जमीन की व्यवस्था भी कर दी है।
आगरा में आईटी पार्क बनाने का पहला प्रस्ताव 2004 में आया था। एसटीपीआई राज्य सरकारों से मुफ्त जमीन लेती है। आगरा विकास प्राधिकरण इसके लिए दी जाने वाली जमीन का पैसा चाहता था। इस कारण काफी दिन तक मामला उलझा रहा। बाद में प्रदेश सरकार ने किस्तों में जमीन की रकम देने का काम शुरू किया। इस बार बकाया बजट से देने का मौका आया तो प्राधिकरण मौजूदा कीमत मांगने लगा। सरकार की सलाह पर प्राधिकरण बोर्ड ने एसटीपीआई को पुरानी दरों पर जमीन देने पर सहमति दे दी। अब सरकार ने पुरानी दर पर पूरा पैसा देकर पार्क की स्थापना का रास्ता साफ कर दिया। प्रदेश सरकार ने एसटीपीआई को पार्क के लिए मुफ्त जमीन उपलब्ध होने की जानकारी भेज दी है। एसटीपीआई के डायरेक्टर नार्थ इंडिया रजनीश अग्रवाल ने बताया कि आगरा आईटी पार्क के बारे में राज्य सरकार की सूचना मिली है।
एडीए को मिल गई जमीन की कीमत
आगरा। आईटी पार्क के लिए आगरा विकास प्राधिकरण ने शास्त्रीपुरम में दो एकड़ जमीन ऑफर की है। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना था कि जमीन का प्रस्ताव तो वर्षों पहले कर दिया था। अब प्राधिकरण ने पुरानी दरों पर जमीन देने की सहमति दी है। इस आधार पर रजिस्ट्री में लगने वाले स्टांप का खर्च जोड़कर करीब 7.22 करोड़ जमीन दे दी जाएगी। इस जमीन के लिए लगभग 6.55 करोड़ रुपये विकास प्राधिकरण के संपत्ति विभाग को मिल भी चुके हैं। शेष रकम रजिस्ट्री के बाद मिल जाएगी।
ऐसा होगा आईटी पार्क
आगरा। एसटीपीआई 20 हजार स्क्वायर फीट में एक आधुनिक आईटी भवन का निर्माण कराती है। एक आईटी पार्क के विकास पर तकरीबन 20 करोड़ रुपये खर्च करती है। इसमें डेटा कम्युनिकेशन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। एक आईटी पार्क में आईटी से जुड़े तकरीबन 150 से 200 उद्यमी अपने कारोबार शुरू कर सकते हैं। आईटी क्षेत्र में नए उद्यमियों को अवसर मिलेंगे। निर्यात भी बढ़ेगा। लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।
एडीए पांच एकड़ बना रहा था पार्क
आगरा। शास्त्रीपुरम में आईटी पार्क बनाने की पहल आगरा विकास प्राधिकरण ने भी की थी। एडीए ने तकरीबन पांच एकड़ में सात मंजिला भवन का खाका तैयार कर लिया था। इसके लिए बजट बोर्ड से बजट भी स्वीकृत हो चुका था, लेकिन किसी भी आईटी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी नहीं दिखाई। प्राधिकरण ने भी कदम खींच लिए। एसटीपीआई महज दो एकड़ में पार्क का निर्माण करेगा। इसके पीछे अहम कारण है कि एसटीपीआई भारत सरकार का उपक्रम है। संस्था का कंपनियों से सीधा संपर्क होता है, ऐसे में आईटी कंपनियों को लाना आसान हो जाएगा।
एसटीपीआई को जमीन उपलब्ध कराने के लिए शासन से पैसा मिल चुका है। संपत्ति विभाग को निर्देश दिया गया है। एसटीपीआई को जल्द से जल्द जमीन पर कब्जा दिया जाए।
- कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव, सचिव, विकास प्राधिकरण