आगरा। थानों में कंप्यूटर से एफआईआर की कॉपी मिल रही है। अपराधियों का डाटा भी ऑनलाइन है। इसके बावजूद ऑफलाइन कार्य में भी कर्मचारियों को अपडेट रहना पड़ेगा। थाने में होने वाली हर गतिविधि, अधिकारियों-शासन के दिशा-निर्देशों का ब्योरा रजिस्टर में भी दर्ज करना होगा। कई बार निरीक्षण में रजिस्टर अपूर्ण मिलने पर सभी थाना प्रभारी को इसे पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि कई बार थानों के निरीक्षण में पाया जाता है कि रजिस्टर या तो उपलब्ध नहीं हैं या फिर उनमें जानकारी नहीं रखी जा रही है। थाने में 80 से अधिक रजिस्टर अलग-अलग जानकारी के लिए होते हैं। इन रजिस्टरों में हर दिन की जानकारी रखनी जरूरी है। थाना प्रभारी और थानाध्यक्षों से कहा गया है कि वह अपने साथ निरीक्षक अपराध, चौकी प्रभारी और मुख्य आरक्षी सहित अन्य की जिम्मेदारी तय करें। तबादला होने पर दूसरे कर्मचारी को कार्य नामित किया जाएगा। लापरवाही बरतने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह हैं रजिस्टर
अभिलेख का रजिस्टर, चिक हस्तक्षेपीय एफआईआर, सामान्य दैनिकी (जीडी), अपराध, माल, वाहन, खोया-पाया, फैक्ट्री निर्मित शस्त्र, मालखाना, ग्राम अपराध (बीसीएनबी), थानाध्यक्ष की गोपनीय पुस्तिका, मफरूर रजिस्टर, चौकीदारों, थानाध्यक्ष की माहवार निरीक्षण पुस्तिका, मरम्मत, हवालात, पूछताछ, रिमांड, अंतिम रिपोर्ट, त्योहार, जमानत, पासपोर्ट, यात्रा भत्ता, गैंग, गुंडा रजिस्टर आदि रजिस्टर शामिल हैं।