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UP: ईरान-अमेरिका युद्ध विराम से खिल उठे आगरा के कारोबारी, जूता-हैंडीक्राफ्ट निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार

Thu, 18 Jun 2026 10:21 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध विराम की खबर से आगरा के जूता और हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों में उत्साह है। निर्यातकों को उम्मीद है कि समुद्री रास्ते सामान्य होने से मालभाड़ा घटेगा, लॉजिस्टिक लागत कम होगी और रुके हुए विदेशी ऑर्डर दोबारा मिलने लगेंगे।
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आगरा का जूता - फोटो : संवाद
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विस्तार
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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम से ताजनगरी के जूता और हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों के चेहरे खिल गए हैं। लाल सागर (रेड सी) संकट और मध्य पूर्व के तनाव के कारण मालभाड़े में हुई भारी वृद्धि और शिपिंग में देरी से जूझ रहे निर्यातकों को समुद्री रास्ते खुलने से फिर कारोबार पटरी पर लौटने की उम्मीद है।
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आगरा से सालाना लगभग 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये का लेदर व नॉन-लेदर जूता यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों को निर्यात होता है। आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चर्स एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने बताया कि युद्ध विराम लागू होने पर एक्सपोर्ट व्यापार में गति आएगी। उन्होंने कहा कि इससे जूते में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम आधारित उत्पादों जैसे सोल, केमिकल की बढ़ी कीमतों पर अंकुश लगेगा। समुद्री रास्ते से माल की आवाजाही सुगम होने से विदेशी कंपनियों का भारतीय उत्पादों में विश्वास और रुचि दोनों बढ़ेगी।
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वहीं, हैंडीक्राफ्ट उद्योग भी महंगे लॉजिस्टिक की मार झेल रहा है। हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अस्थाना ने कहा कि युद्ध विराम से निर्यात को वास्तविक संजीवनी मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में कमी आएगी। युद्ध और समुद्री मार्ग परिवर्तन (केप ऑफ गुड होप के रास्ते) के कारण पैकेजिंग और लॉजिस्टिक की लागत कई गुना बढ़ गई थी और माल पहुंचने में बहुत समय लग रहा था। अब सब सामान्य होने की उम्मीद है। समुद्री मार्ग सुरक्षित होने से कंटेनरों का भाड़ा (फ्रेट चार्ज) सामान्य स्तर पर आएगा, जिससे विदेशी खरीदारों के रुके हुए ऑर्डर दोबारा आगरा के कारखानों का रुख करेंगे और जिले में निर्यात को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

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