भोगीपुरा में तालाब को पाटकर पक्की दुकानें बनाई गईं और शराब के दो ठेके भी खोल लिए गए। डीएम के आदेश के बावजूद इन्हें हटाया नहीं गया। आसपास के लोग सात साल से तहसील से लेकर कलक्ट्रेट और एडीए से लेकर नगर निगम तक चक्कर काट रहे हैं।
मौजा भोगीपुरा में राजस्व रिकॉर्ड में 367 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पुरानी पोखर है। खसरा-खतौनी में वक्फ बोर्ड भूमि पर पोखर दर्ज है। बुधवार को अमर उजाला टीम यहां पहुंची तो मौके पर आठ पक्की दुकानों का निर्माण मिला। दो दुकानों में शराब की मॉडल शॉप खुली है।
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क्षेत्रीय निवासी परशुराम शर्मा ने बताया कि पोखर में पूरे इलाके की नालियों का और बरसात में पानी इकठ्ठा होता था। 2013 में जब यहां अतिक्रमण व अवैध निर्माण हो रहे थे तब मैंने तत्कालीन डीएम जुहेर बिन सगीर से शिकायत की थी। उन्होंने नगर आयुक्त को पोखर से अवैध कब्जे हटाने के आदेश किए थे। इसके बाद भी अफसर नगर निगम, कलक्ट्रेट, तहसील और एडीए में चक्कर लगवाते रहे, लेकिन अतिक्रमण ध्वस्त नहीं किए। उन्होंने क्षेत्रीय लेखपाल व अधिकारियों पर कब्जा नहीं हटाने के नाम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।