माध्यमिक शिक्षा विभाग में 41 फर्जी नियुक्तियों के मामले की जांच फिर से शुरू हो गई है। इस बार शासन ने जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई है। एसआईटी ने डीआईओएस से फर्जी नियुक्तियों से जुड़े रिकार्ड तलब किए हैं। संबंधित कर्मचारियों को पूछताछ के लिए लखनऊ भी बुलाया है। फर्जीवाड़े में विभाग के कई कर्मचारी और अधिकारी फंस सकते हैं।
बीते साल तत्कालीन डीआईओएस दिनेश कुमार के समय में शिक्षक, बाबू और चपरासी पद पर 41 नियुक्ति फर्जी होने की शिकायत संयुक्त शिक्षा निदेशक से की गई थी। उस समय शासन ने यह जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) आरपी शर्मा को दी थी। जांच के दौरान नियुक्ति के संबंध में कोई भी पत्रावली स्कूलों से उपलब्ध नहीं हुई। स्कूलों की तरफ से नियुक्ति संबंधी जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया। जांच के दौरान जेडी आरपी शर्मा को विजिलेंस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया।
अब शासन ने फिर से फर्जी नियुक्तियों की जांच कराने का आदेश दिया है। इस बाबत माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने 25 फरवरी को पत्र जारी किया है। जिसमें अशासकीय सहायता प्राप्त और संस्कृत विद्यालयों में फर्जी नियुक्ति की जांच का निर्देश दिया गया है। आगरा के साथ बलिया, आजमगढ़ और जौनपुर में भी फर्जी नियुक्तियों की जांच की जा रही है।
डीआईओएस चंद्रशेखर ने बताया कि शासन के निर्देश पर पुरानी नियुक्तियों की जांच की जा रही है। स्कूल संचालकों और कर्मचारियों से रिकार्ड मांगे हैं। एसआईटी जिन कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुला रही है, उनको नोटिस देकर लखनऊ भी भेजा जाएगा।
मामले में 20 मार्च को होनी है सुनवाई
फर्जी नियुक्तियों की जांच एसआईटी करने की जानकारी के बाद फर्जी तरीके से नौकरी पाने वालों की नींद उड़ी हुई है। पूर्व जांच के दौरान कार्यवाहक डीआईओएस डॉ. मानवेंद्र सिंह ने इनके वेतन जारी करने पर रोक लगा दी थी। इस पर कर्मचारियों ने फर्जी नियुक्तियों का वेतन जारी कराने के लिए साजिश भी रची थी। इसमें संयुक्त शिक्षा निदेशक भी फंस गए थे। इस मामले में 20 मार्च को लखनऊ में सुनवाई होने की चर्चा है, जिसे लेकर कर्मचारी खुद को बचाने में लग गए है। चर्चा है कि इस खेल का एक मास्टर माइंड सेवानिवृत्त हो चुका है, तो एक अन्य कर्मचारी पहले से निशाने पर है।