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प्रवासी हिंदी साहित्य का सूर्यास्त नहीं होता: डा. गोयनका

Sat, 13 Jan 2018 05:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उपस्थित अतिथि - फोटो : अमर उजाला
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‘प्रवासी हिंदी साहित्य का सूर्यास्त नहीं होता। यह वैश्विक साहित्य है। मॉरीशस ही नहीं पूरी दुनिया में लिखा जा रहा है।’ केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के उपाध्यक्ष डा. कमल किशोर गोयनका ने ये बातें शुक्रवार को डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जेपी सभागार में कहीं। 
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साहित्य अकादमी, नई दिल्ली व हिंदी वैश्विक संस्थान, नीदरलैंड के तत्वावधान में विवि के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ की ओर से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। 

डा. कमल किशोर गोयनका इसमें बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रवासी साहित्यकार वेदना व्यक्त करते हैं कि उन्हें हिंदी साहित्य की मुख्यधारा से नहीं जोड़ा जाता। प्रवासी शब्द उनकी विशेषता का परिचायक है। 
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यह उनको और विशिष्ट बनाता है। उन्होंने कहा कि प्रवासी साहित्य हमारी संपत्ति है। हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने विवि के कुलपति के समक्ष प्रस्ताव रखा कि ऐसा पुस्तकालय बनाया जाए, जिसमें प्रवासी भारतीय साहित्य की हर पुस्तक उपलब्ध हो। पूरे विश्व से लोग आकर उसमें शोध रिसर्च करेंगे। 

'तो भारत का स्वरूप कुछ और होता'

हिंदी वैश्विक संस्थान, नीदरलैंड (यूरोप) की निदेशक प्रो. पुष्पिता अवस्थी ने बीज वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस अपनी पूरी आयु जीते तो भारत का स्वरूप कुछ और होता। 

स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और भाषा का दुनिया में प्रचार किया। भारतवंशी जहां भी गए, भारतीय संस्कृति का प्रसार किया। उन्होंने हस्तलिखित हिंदी के गायब होने पर दुख भी जताया। उन्होंने कहा की हस्तलिपि दिल से निकलती थी। 

मुख्य अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि यदि साहित्य में अपने समय की संवेदना की अभिव्यक्ति है तो वह कालजयी होगा ही। 

कार्यक्रम के अध्यक्ष कुलपति डा. अरविंद कुमार दीक्षित ने कहा कि भारत जितना मजबूत होगा, इसकी बात उतनी ही सुनी जाएगी। इसके दर्शन को विश्व भर में स्वीकार किया जाएगा। 

महारानी विक्टोरिया ने हिंदी में लिखी पहली डायरी 

उन्होंने कहा कि विवि के डिजिटल पुस्तकालय में प्रवासी साहित्य की पुस्तकों को स्कैन कराकर डाला जाएगा। उन्होंने संगोष्ठी के आयोजन के लिए केएमआई के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर और उनकी टीम का धन्यवाद किया। मॉरीशस के प्रतिनिधिमंडल के साथ आई अंजलि चिंतामणि ने मॉरीशस प्रवासी हिंदी के इतिहास पर प्रकाश डाला। 

अखिल विश्व हिंदी समिति, न्यूयार्क के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दाऊजी गुप्त ने बताया कि महारानी विक्टोरिया ने करीब 150 वर्ष पूर्व अपनी पहली डायरी हिंदी में लिखी थी। 

वर्षों से भारतीय दुनिया भर में हिंदी का प्रसार कर रहे हैं। वह बहुत पहले एक अफ्रीकी देश गए थे। एक प्रवासी मुसलिम परिवार में सोहर गाया जा रहा था ‘बीबी अमीना के भए नंदलाल।’ 
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'जो हिंदी नहीं बोलता वह भारतीय नहीं'

नीदरलैंड से आए हिंदी सेवी भगवान प्रसाद ने कहा कि जो हिंदी नहीं बोलता वह भारतीय नहीं है। उन्होंने बताया कि वह बुधवार को कोलकाता में एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल हुए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने करीब आधे घंटे बांग्ला में बोला, कुछ समझ में नहीं आया। 

संगोष्ठी में प्रो. पुष्पिता अवस्थी की पुस्तक ‘नीदरलैंड डायरी’ और प्रो. प्रदीप श्रीधर द्वारा संपादित पुस्तक ‘प्रवासी हिंदी साहित्य: दशा एवं दिशा’ का विमोचन किया गया।  
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