मोदी सरकार के अंतरिम बजट पर सभी की नजरें टिकी हैं। आम जनता को राहत की उम्मीद है। किसान, मजदूर महंगाई कम होने की आस लगाए बैठा है तो युवा रोजगार की उम्मीद के साथ। वहीं आगरा में पर्यटन व्यवसायियों को भी बजट से काफी उम्मीदें हैं। आगरा में तीन-तीन विश्वदाय स्मारक होने के बावजूद पर्यटकों के लिए शहर में विश्वस्तरीय सुविधाएं नहीं हैं।
तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक ऐसी कोई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो सकी है, जिससे कि देसी-विदेशी पर्यटक आगरा यात्रा की सुखद अनुभूति लेकर जाए। पर्यटन प्रोत्साहन की भी कोई योजना नहीं है। ऐसे में पर्यटन जगत को उम्मीद है कि पर्यटन पर निर्भर आगरा में सुविधाएं तो बढ़ाई ही जाएं, प्रोत्साहन के लिए कुछ योजनाओं की भी घोषणा की जाए।
आम बजट में पर्यटन महत्व वाले शहरों के लिए अलग से बजट की व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे कि पर्यटन पर निर्भर आगरा जैसे शहरों में निरंतर समुचित विकास होता रहे। पर्यटन को सुविधाएं मिलती रहें। तभी पर्यटन बढ़ेगा।
- राकेश चौहान, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन
होटल उद्योग के लिए नई नीति आनी चाहिए। ताकि पर्यटन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक होटलों का निर्माण का रास्ता खुल सके। व्यवसायी भी इस इंडस्ट्री की ओर आकर्षित हों।
- संदीप अरोड़ा, पर्यटन उद्यमी
आगरा में तीन विश्वदाय स्मारक हैं, इसके बावजूद जिस स्तर की सुविधाएं यहां होनी चाहिए, पर्यटकों को वह नहीं मिल पातीं। विभाग बजट की कमी की आड़ में हाथ खड़े कर देते हैं। इसलिए आम बजट में पर्यटन क्षेत्र के लिए बजट बढ़ना चाहिए।
- नरेंद्र गुप्ता, पर्यटन उद्यमी
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तो दूर सरकार अब तक सिविल एन्क्लेव तक शुरू नहीं कर पाई है। यदि बजट के अभाव में यह योजना रुकी हुई है तो इसके लिए बजट पास होना चाहिए। ताकि आगरा को सीधे विदेशों से जोड़ा जा सके।
- संदीप जैन, पर्यटन उद्यमी
ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी खासी उम्मीदें
उधर, आम बजट से ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी खासी उम्मीदें हैं। ट्रांसपोर्टर्स का मानना है कि फाइनेंस एक्ट 2018 में आयकर की धारा 44 ई में बदलाव किया गया था, जिस कारण ट्रांसपोर्टर्स पर भार बहुत बढ़ गया है।
इसमें बदलाव करके इसे एक हजार प्रति ट्रक के स्थान पर पुन: 750 रुपये प्रतिमाह किया जाए। डीजल और पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। टोल नीति में परिवर्तन भी जरूरी हो गया है।
आयकर की धारा में हो बदलाव
ट्रांसपोर्ट चैंबर एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता का कहना है कि आयकर की धारा 44 ई में बदलाव करके ट्रांसपोर्टर्स को राहत दी जाए। वित्त मंत्री ने एआईएमटीसी के पदाधिकारियों को आश्वस्त भी किया था। पेट्रोल-डीजल की कीमतें को नियंत्रित करने के लिए इन्हें जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए। टोल नीति में बदलाव भी बड़ी जरूरत बन चुका है।
टोल नीति में हो बदलाव
आगरा गुड्स कैरियर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को राहत तभी मिल सकेगी, जबकि टोल नीति में बदलाव किया जाए। ई वे बिल की समस्याओं का समाधान हो। आयकर में छूट की सीमा भी पांच लाख रुपये तक की जाए। माल भाड़ा नहीं बढ़ सका है, जबकि व्यवसाय करना और जटिल होता जा रहा है।
आगरा पब्लिक कैरियर एसोसिएशन के महासचिव देवेंद्र गुप्ता का कहना है कि ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए टोल फ्री इंडिया होना चाहिए। ट्रांसपोर्टर्स को नेशनल परमिट दिए जाएं। पूरे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम एक समान होने चाहिए। इससे भाड़े में बड़ा अंतर आता है। टायर कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाए। एंटी डंपिंग ड्यूटी को खत्म किया जाए।
रोजगार की आस
छात्र-छात्राएं चाहते हैं सरकार उनके लिए और अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। दयालबाग शिक्षण संस्थान की पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स की छात्रा कृति लेखा का कहना है कि सरकार को युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने की जरूरत है। भर्तियों को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। अधिकतर भर्तियों किसी न किसी कारणों से लटक जा रही हैं।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के एमए समाजशास्त्र के छात्र दीप कुमार गर्ग का कहना है कि शिक्षक संस्थानों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध कराए जाने चाहिए। कैंपस प्लेसमेंट की व्यवस्था करनी चाहिए। इसी विश्वविद्यालय के एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र दीपक चाहर का कहना है कि प्रयोगशालाओं को हाईटेक बनाया जाना चाहिए। रोजगार के अवसर और बढ़ाए जाने चाहिए