अखिलेश-बघेल का दिखेगा असर
पड़ोसी जनपद मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से सपा से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भाजपा से केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल के चुनाव मैदान में उतरने का सिरसागंज सीट पर भी प्रभाव पड़ेगा। सर्वेश यादव को जहां संजीवनी मिली है। वहीं हरिओम यादव भी वोटों के बिखराव की चिंता से बेफिक्र हुए हैं।
विधानसभा सीट का इतिहास
वर्ष-2008 से पूर्व सिरसागंज नगर घिरोर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था। 2008 में सिरसागंज विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ तो उसमें सिरसागंज नगर के साथ शिकोहाबाद, करहल और घिरोर के आंशिक भाग को शामिल किया गया। सिरसागंज विधानसभा सीट पर 2012 और 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में दोनों बार सपा से हरिओम यादव को जीत हासिल हुई।
57 से अधिक शीतगृह
सिरसागंज को आलू उत्पादन का मुख्य केंद्र माना जाता है। विधानसभा क्षेत्र में 57 से अधिक शीतगृह संचालित हैं।
कुल मतदाता
- कुल मतदाता - 3,19,912
- पुरुष मतदाता - 1,72,318
- महिला मतदाता - 1,47,579
- अन्य मतदाता - 15
जातिगत आंकड़े
- यादव- 1.20 यादव
- क्षत्रिय- 55 हजार
- लोधी राजपूत- 35 हजार
- दलित- 25 हजार
- बघेल- 30 हजार
- कुशवाहा- 15 हजार
- मुस्लिम- 12 हजार
- ब्राह्मण- 08 हजार
सिरसागंज के प्रमुख मुद्दे
सिरसागंज क्षेत्र में सर्वाधिक आलू का उत्पादन होता है पर इसका लाभ किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। फसल के दौरान दाम इतने गिर गिर जाते है कि आलू को फेंकने की नौबत आ जाती है। किसान सरकार से आलू प्रोसेसिंग फैक्ट्री लगाने की मांग कर रहे हैं।
निराश्रित गोवंश फसलों को नष्ट कर देते हैं। गोश गांव में भी खुले घूमते रहते हैं, जो किसानों की परेशानी का सबब बने हुए हैं। रजिस्ट्रार दफ्तर न होने से लोगों को 20 किमी दूर शिकोहाबाद जाना पड़ता है। मांग के बाद भी रजिस्ट्रार दफ्तर नहीं खुल सका।