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पुलिस हिरासत में मौत का मामला: थाने में इस कदर की थी राजू की पिटाई, चली गई जान; दरोगा को 10 साल की हुई सजा

Fri, 20 Mar 2026 08:29 AM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के सिकंदरा थाने में 2018 में हुई राजू गुप्ता की हिरासत मौत के मामले में सात साल से अधिक समय बाद अदालत ने दरोगा अनुज सिरोही को 10 साल और पड़ोसी अंशुल प्रताप को 7 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने विवेचना में गंभीर खामियां पाते हुए तत्कालीन जांच अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
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थाना सिकंदरा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के  सिकंदरा थाना पुलिस की हिरासत में हुई राजू गुप्ता की मौत के मामले में सात साल तीन महीने 27 दिन बाद बृहस्पतिवार को फैसला आया। एडीजे-17 नितिन कुमार ठाकुर की कोर्ट ने दरोगा अनुज सिरोही को 10 साल और मृतक के पड़ोसी अंशुल प्रताप को सात साल कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने विवेचना में गंभीर खामियां मिलने पर तत्कालीन जांच अधिकारियों सीओ चमन सिंह चावड़ा और थाना लोहामंडी के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार पांडेय के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साक्ष्य में अभाव में कोर्ट ने एक आरोपी को बरी कर दिया।
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घटना 21 नवंबर 2018 की है। सिकंदरा स्थित नरेंद्र एन्क्लेव में राजू गुप्ता अपनी मां रेनू गुप्ता के साथ किराये के मकान में रहते थे। पड़ोसी अंशुल प्रताप ने उन पर घर से आभूषण का बैग चोरी करने का आरोप लगाया था। साथ ही राजू को घर में बंधक बनाकर पीटा गया था। अंशुल की शिकायत पर थाना सिकंदरा पुलिस 21 नवंबर 2018 को राजू को थाने ले गई थी। रेनू ने आरोप लगाया था कि उनके सामने ही बेटे को पुलिस ने बेरहमी से पीटा। हवालात में दूसरे दिन राजू की तबीयत बिगड़ गई। पुलिस अस्पताल लेकर पहुंची तब तक राजू की मौत हो गई थी। पुलिस हिरासत में राजू की मौत पर वैश्य समाज ने मोर्चा खोल दिया था। जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया था। पोस्टमार्टम में राजू के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले थे।

 

आंदोलन के बाद पुलिस ने चोरी का आरोप लगाने वाले अंशुल, पड़ोसी विवेक और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। विवेचना लोहामंडी थाना प्रभारी से कराई गई थी। विवेचक ने अंशुल प्रताप, दरोगा अनुज सिरोही और विवेक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या में चार्जशीट लगाई थी। मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर मुकदमे की विवेचना सीआईडी को ट्रांसफर की गई थी। घटना के समय थाना सिकंदरा का प्रभार इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह पर था।


 

इन्हें हुई सजा
अदालत ने दो अलग-अलग सत्र परीक्षणों में फैसला सुनाया। इसमें बुलंदशहर के फतेहपुर अगौता निवासी अनुज सिरोही (तत्कालीन उपनिरीक्षक, थाना सिकंदरा) को गैर-इरादतन हत्या का दोषी पाया। उसे 10 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जमानत पर चल रहे अनुज सिरोही को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सिकंदरा थाना क्षेत्र के नरेंद्र एन्क्लेव गैलाना रोड निवासी अंशुल प्रताप सिंह को गैर इरादतन हत्या में सात साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। उसे भी जेल भेज दिया गया। विवेक कुमार सिंह को साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया।


 

कोर्ट ने माना दोषपूर्ण हुई विवेचना
कोर्ट ने केस की विवेचना पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी भी की। कोर्ट ने माना कि पुलिस अधिकारियों ने विवेचना में लापरवाही बरती। साक्ष्यों के साथ न्याय नहीं किया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है कि तत्कालीन निरीक्षक राजेश कुमार पांडेय (वर्तमान में फिरोजाबाद के थाना जसराना के प्रभारी) और तत्कालीन क्षेत्राधिकारी चमन सिंह चावड़ा (वर्तमान में भदोही में तैनात) के खिलाफ सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में इन अधिकारियों की ओर से की गई विवेचना को त्रुटिपूर्ण करार दिया है।

 
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सीआईडी ने 17 पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाई थी चार्जशीट
आगरा। थाना सिकंदरा पुलिस की हिरासत में मौत के मामले में सीआईडी की विवेचना अहम रही। घटना के करीब साढ़े छह साल बाद चार्जशीट लगाई गई थी। सीआईडी ने विवेचना में सिकंदरा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर, दो एसआई, चार एचसीपी सहित 17 पुलिसकर्मियों को अवैध हिरासत और गैर इरादतन हत्या का आरोपी माना था।
अदालत ने 82 पन्नों के अपने विस्तृत आदेश में सजा सुनाने के लिए कई आधारों को मुख्य माना। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशान ने साबित किया कि राजू की मौत पुलिस अभिरक्षा में शारीरिक प्रताड़ना के कारण हुई थी। घटना के समय और स्थान (थाना सिकंदरा) पर अभियुक्तों की मौजूदगी थी। राजू को घर से उठाए जाने की कड़ियों को कोर्ट ने पुख्ता माना।
सीआईडी की चार्जशीट में तत्कालीन प्रभारी इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह, दरोगा ज्ञानेंद्र शर्मा, दरोगा तेजवीर सिंह, मुख्य आरक्षी रामकिशन, देवेंद्र सिंह, राकेश कुमार, रंजीत, आरक्षी हरीशचंद्र, बृजेश कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांक कुमार, आरक्षी संजीव कुमार, राजेश, सतेंद्र सिंह, संजीव, अनिल कुमार, जोगेश कुमार और आरक्षी चालक संजय कुमार आरोपी बने थे। उस समय एसपी सीआईडी राजेंद्र यादव थे। 
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