शुरू हुई भ्रष्टाचार के सीमेंट से बने सेतु की जांच
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लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता ने भेजी थी रिपोर्ट
तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर और दो अन्य अफसर निशाने पर
सेतु निगम के संयुक्त निदेशक को सौंपी गई मामले की जांच
निर्माण के महज पांच वर्ष के भीतर दो बार धंसने वाले अंबेडकर पुल ने सेतु निगम की साख पर बट्टा लगा दिया है। शासन ने भी इस मामले को गंभीरता लेते हुए मामले की जांच शुरू करा दी है। निगम के संयुक्त निदेशक तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर के खिलाफ जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे।
गौरतलब है कि जवाहर पुल पर वाहनों के अधिक लोड और जाम के हालातों को देखते हुए 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पुल की आधारशिला रखी थी। करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल पर 2011 में यातायात शुरू हो गया। शहर की जनता को अतिरिक्त सुविधा मिली और रामबाग, वाटर वर्क्स पर जाम की समस्या कुछ कम हुई। लेकिन चालू होने के वर्षभर बाद ही अंबेडकर पुल में दरारें आ गईं। मरम्मत के लिए पुल को करीब सात दिन बंद रखा गया। तभी हो-हल्ला हुआ लेकिन निगम के अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में कामयाब रहे। भ्रष्टाचार का गहरा लगा दाग पूरी तरह से नहीं मिटा था और पांच जून को पुल का एक बड़ा हिस्सा दोबारा धंस गया और गर्डरों के बीच दरारें आ गई। मरम्मत के लिए पुल को दोबारा बंद करना पड़ा है।
लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता मसर्रत नूर खान ने पिछले दिनों मामले की रिपोर्ट शासन और सेतु निगम को भेजी थी। उनकी रिपोर्ट पर शासन ने निगम के संयुक्त निदेशक यूजे शुक्ला को जांच सौंपी है। वे पुल के तकनीकी पहलुओं और तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर गेंदा लाल, सहायक अभियंता विक्रम सिंह और जूनियर इंजीनियर शंकर लाल की कार्यप्रणाली की जांच कर शासन को रिपोर्ट सौंपेंगे।