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UP: बेशकीमती जमीन पर कब्जे के लिए पहले बेगुनाह परिवार को भेजा जेल, फिर भी पुलिस लीपापोती से बाज नहीं आ रही

Tue, 21 May 2024 09:53 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में बेशकीमती जमीन पर कब्जे के लिए पुलिस ने बेगुनाह परिवार को जेल भेज दिया। इस मामले में जांच हुई तो पुलिस की हरकतों की कहानियां खुलती गईं। हद तो ये है कि पुलिस अभी भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। सरकारी कर्मियों पर दर्ज मुकदमों में पुलिस लीपापोती कर रही है। 
 
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जगदीशपुरा थाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आम मुकदमों में तेजी दिखाने वाली पुलिस सरकारी कर्मियों पर दर्ज मुकदमों में लीपापोती कर रही है। बोदला जमीन कांड में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में निगम के तत्कालीन सेनेटरी सुपरवाइजर पर एक महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही हाल आगरा विकास प्राधिकरण के सचिव के फर्जी हस्ताक्षर के मामले का भी है। सचिव को नामजद किया गया था। मगर, पुलिस की विवेचना एक कदम नहीं बढ़ सकी है।
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पहला मामला बोदला जमीन कांड से जुड़ा हुआ है। जमीन मालिक सरदार टहल सिंह का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कराने में शामिल आवेदक, गवाह और सेनेटरी सुपरवाइजर सहित 5 के खिलाफ थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज किया गया। टहल सिंह का भतीजा बनकर फ्रीगंज निवासी किशन मुरारी ने आवेदन किया था। मृत्यु की गवाही में रवि कुशवाह, किशोरपुरा निवासी सरला देवी और दीनानाथ का नाम था। तत्कालीन सेनेटरी सुपरवाइजर ओमप्रकाश ने स्थलीय जांच कर गवाहों के बयान दर्ज किए थे। इनमें सभी लोग आरोपी बनाए गए।

 

थाना हरीपर्वत में मुकदमा लिखा गया। एक महीने बाद भी केस की जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। थाना हरीपर्वत के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि साक्ष्य संकलन किया जा रहा है। बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद कार्रवाई होगी। सेनेटरी सुपरवाइजर रिटायर्ड हो चुके हैं। उनसे भी पूछताछ की जाएगी।

 

दूसरा मामला आगरा विकास प्राधिकरण के सचिव के फर्जी हस्ताक्षर का है। मई के पहले सप्ताह में आगरा विकास प्राधिकरण की ओर से सचिव के फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में प्रवर्तन लिपिक दुष्यंत शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज की धारा में मुकदमा दर्ज कराया गया।

 
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लिपिक पर आरोप था कि अवैध निर्माण पर सीलिंग के जो आदेश दिए गए, उन पर सचिव के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। आरोपी लिपिक को निलंबित भी किया गया था। थानाध्यक्ष लोहामंडी ने बताया कि विवेचना की जा रही है। लिपिक की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। फर्जी हस्ताक्षर के पीछे कौन-कौन लोग हैं, यह पता किया जाएगा। आगरा विकास प्राधिकरण अधिकारियों से भी वार्ता की जाएगी, जिससे पत्र जारी करने के पीछे का कारण भी पता चल सके।
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