शिवम ने कई बार इमरजेंसी में तैनात स्टॉफ से उसका इलाज करने और उसे भर्ती करने का अनुरोध किया। हर बार डॉक्टर ने यही कहा कि उसे मामूली चोट लगी है, घर ले जाओ। शुक्रवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दोपहर 12 बजे तक परिजन उसे लिटाए रहे।
शुक्रवार को निजी चिकित्सकों की हड़ताल के चलते उसे निजी अस्पताल में भी इलाज नहीं मिला। सिर्फ उसका एक्सरे ही हो सका। दोपहर को मीडिया ने जब मामला उठाया, तब जाकर घायल युवक को अस्पताल में भर्ती किया गया।
पहले भी सामने आए हैं इस तरह के मामले
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। बीते वर्ष 21 नवंबर को इसी तरह युवक इमरजेंसी के बाहर दर्द से तड़पता रहा, लेकिन उसे इलाज नहीं दिया गया। महिला अस्पताल में प्रसूता को भर्ती नहीं किया गया। इससे उसका प्रसव अस्पताल के बाहर ही हो गया।
सीएमएम डॉ. आरके सागर ने बताया कि गंभीर रूप से घायल युवक के साथी को भर्ती कर लिया गया था। युवक को मामूली चोट थी, प्राथमिक उपचार के बाद घर ले जाने को कहा था। परिजन उसे घर नहीं ले गए। इसके बाद जानकारी मिलने के बाद उसे भर्ती कराने के आदेश दिए गए हैं।