मुसीबत आने पर रेलवे के यात्री सुविधाओं के दावों की हवा निकल जाती है। मंगलवार को दिल्ली से जबलपुर जा रही महाकौशल एक्सप्रेस के सामान्य कोच में मथुरा के समीप महिला को प्रसव हुआ लेकिन जंक्शन पर न कोई डाक्टर पहुंचा, न ही अधिकारी। हां, जीआरपी ने मानवता दिखाई और आननफानन मदद भिजवाई, जबकि यह काम स्टेशन पर मौजूद डाक्टर्स का था। जो संवेदनहीन रहे।
महोबा निवासी रामा दिल्ली में मजदूर करते हैं। वह पत्नी सोनम (24) के साथ मंगलवार को महोबा जाने के लिए महाकौशल एक्सप्रेस के सामान्य कोच में बैठे। फरीदाबाद पार करने के बाद सोनम को प्रसव पीड़ा हुई। रामा ने ट्रेन स्टाफ को बताया। सुनवाई न होने पर महिलाओं ने पुरुषों को कोच से हटाया। मथुरा जंक्शन के नजदीक शाम करीब 6.20 बजे उसने बेटे को जन्म दिया। इस बीच जीआरपी हेडक्वार्टर की हेल्प लाइन 1512 से मिली सूचना पर एसपी गोपेशनाथ खन्ना ने मथुरा जीआरपी से लेडी स्टाफ को ट्रेन में भेजकर मदद मुहैया करवाई। स्टाफ आगरा कैंट स्टेशन तक जच्चा-बच्चा के साथ आया। कैंट जीआरपी ने खाने पीने और शिशु के लिए कपड़े, चादर का इंतजाम किया। दंपति नवजात के साथ महोबा के लिए निकल गया।
कहां थे डाक्टर
कैंट स्टेशन से सौ मीटर की दूरी पर रेलवे का अस्पताल है। मगर, जानकारी के बाद भी कोई डाक्टर नहीं आया। रेलवे हमेशा से ऐसे केस में बच्चों को किट प्रदान करने का दावा करती है, तो बच्चे को किट क्यों नहीं दी गई।
वर्जन:
किसी यात्री ने जीआरपी हेल्प लाइन 1512 पर फोन किया। मौके पर लेडी स्टाफ को भेजकर महिला की मदद कराई गई।
- गोपेश नाथ खन्ना, एसपी जीआरपी
इन बाक्स (हाईलाइट करें)
रिकार्ड में बच्चे का नाम ‘गतिमान’ दर्ज
देश ही पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन गतिमान के नाम पर महाकौशल एक्सप्रेस में जन्मे शिशु का नाम गतिमान रिकार्ड में दर्ज किया गया है। एसपी जीआरपी ने तर्क दिया कि ट्रेन में पैदा हुआ है, इसलिए एक ट्रेन के नाम पर उसका नाम ‘गतिमान’ रिकार्ड में दर्ज किया है।