राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि भारत को गलत इतिहास पढ़ाकर उसकी संस्कृति और ज्ञान परंपरा को कमजोर किया गया। उन्होंने मैकाले की शिक्षा नीति और पश्चिमी इतिहास लेखन पर गंभीर सवाल उठाए।
विदेशियों ने भारत का झूठा इतिहास गढ़ा। भारत में सदियों पहले से विज्ञान, चिकित्सा, अंतरिक्ष, गणित, आयुर्वेद, भूगोल समेत सभी का अध्यापन होता था और भारतीय ज्ञान-संस्कृति सदियों से दुनिया में श्रेष्ठ रही है। मैकाले की शिक्षा नीति ने भारत की संस्कृति और शिक्षा पद्धति को भारी नुकसान पहुुंचाया। नई शिक्षा नीति से इसकी भरपाई होगी। ये बातें बृहस्पतिवार को केंद्रीय हिंदी संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने कहीं।
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केंद्रीय हिंदी संस्थान में भारतीय पुस्तकालय संघ की ओर से कृत्रिम बुद्धिमता के युग में पुस्तकालय सेवाओं का रूपांतरण विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का राज्यपाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि किताबों में लिखा है कि न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण की खोज की जबकि 1150 में भास्कराचार्य ने लीलावती में सूर्य-चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के बारे में बताया था। पृथ्वी से सूर्य, चंद्र का अंतर भी किताब में लिखा है। हमें पढ़ाया गया कि राइट बंधुओं ने हवाई जहाज बनाया, यह पूरी तरह से झूठ है। सदियों पहले महर्षि भारद्वाज के ग्रंथ यंत्र सर्वस्व में विमान शास्त्र में प्रकार, संचालन की विधि और उड़ाने का पूर्ण विवरण दर्ज है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के विद्वान शिवकर बापूजी तलपड़े ने 1895 में मुंबई चौपाटी में 1500 फीट ऊंचाई तक मानव रहित विमान उड़ाया था। अंग्रेजों ने उनको दंडित कर विधि चुराई और इंग्लैंड लेकर गए। समझ में नहीं आया तो उन्होंने अमेरिका को विधि साझा कर दी। तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय समेत 90 लाख पुस्तकों के भंडारण को भी जला दिया गया। भारत पुस्तक बाजार में तीसरे नंबर पर और छपाई में 10वें नंबर पर है। ऐसे में पुस्तक छपाई और अध्यापन को बढ़ाना होगा।
उन्होंने बताया कि जैसलमेर के भदरिया गांव में जमीन के 20 फीट नीचे पुस्तकालय बना है, जो एशिया का सबसे बड़ा भूमिगत पुस्तकालय है। दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. डीवी सिंह ने कहा कि आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस से ज्यादा ह्यूमन इंटेलिजेंस जरूरी है, ऐसा नहीं होने पर मानव मस्तिष्क पर तकनीक नियंत्रण करने लगेगी।
केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि एआई को सहयाेगी के तौर पर इस्तेमाल करने से ये तरक्की का जरिया बनेगी। निदेशक प्रो. सुनील बाबूराव कुलकर्णी ने बताया कि 157 देशों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। 56 भाषाओं का हिंदी में अनुवाद हुआ है। भारतीय पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप राय ने पुस्तकालय के रिक्त पदों की भर्ती और फंड देने की बात की। संचालन डॉ. पुरुषोत्तम पाटिल ने किया और डॉ. अंकुश औंधकर ने आभार जताया।
इन्हें मिला हिंदी पुरस्कार
संघ के महासचिव डॉ. धरम कुमार ने आईआईटी गुवाहाटी के पुस्तकालय के अध्यक्ष डॉ. तमाल कुमार गुहा और डीईआई के पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. मांगेराम को हिंदी सम्मान पुरस्कार से सम्मानित किया। राज्यपाल ने कई पुस्तकों का विमोचन भी किया।
रंगारंग कार्यक्रम ने मोहा मन
समारोह में श्रीलंका, थाईलैंड, उज्बेकिस्तान, मिस्र, मंगोलिया, रूस, चीन, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान के छात्र-छात्राओं ने हिंदी में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गीत, कविता और भारतीय गीतों पर नृत्य भी किया। प्रस्तुति देखकर सभी ने जमकर तालियां बजाईं।