शीरोज हैंगआउट कैफे के पीआर मैनेजर केतन दीक्षित भी बीबीसी की राह पर चल पड़े हैं। एलान किया है कि वह प्रतिबंधित डाक्यूमेंट्री ‘इंडियाज डॉटर’ का गांव-गांव प्रदर्शन करेंगे। छांव फाउंडेशन के सहयोगी ने रविवार को ग्राम रूपधनू में सार्वजनिक रूप से यह फिल्म दिखाकर सनसनी फैला दी थी। प्रतिबंध के विरोध में ही उन्होंने डाक्यूमेंट्री दिखाई।
बता दें, केतन ने एक साथी राहुल की मदद से आगरा से 40 किमी दूर रूपधनू गांव में प्रोजेक्टर के जरिए बीबीसी द्वारा दिल्ली रेप कांड पर बनाई गई इस वृत्तफिल्म का प्रदर्शन किया। अंग्रेजी में बनी फिल्म के संवाद उन्होंने हिंदी में अनुवाद कर लोगों को समझाया। इसी सिलसिले में सोमवार को बरहन थाने में पुलिस ने उनसे और शीरोज हैंग आउट से ही जुड़े राहुल कुमार से चार घंटे पूछताछ की। ग्राम प्रधान की सुपर्दगी में दिए जाने (रिहाई) के बाद केतन ने माडिया से कहा कि दिल्ली रेपकांड के आरोपी मुकेश के बयान से उसका असली चेहरा सामने आया। इसी कारणबयान को निंदा करने के बाद भी वह चाहते हैं कि सब इसे देखेंं।
केतन ने कहा, ‘गांव की तमाम महिलाओं और पुरुषों ने फिल्म को देखा और सराहा। लिहाजा सरकार को तत्काल बैन हटा लेना। अगर, ऐसा नहीं होता है तो हम गांव-गांव जाकर इसका प्रसारण करते रहेंगे।’ केतन ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। कहा कि इसकी जानकारी संस्था के दिल्ली मुख्यालय को दे दी गई है। इसे फेसबुक और ट्वीटर पर अपलोड किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय जाने की बात कह रहे केतन ने कहा कि इस मुद्दे पर पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा। ग्राम रूपधनू के बड़े और बुजुर्गों ने फिल्म दिखाए जाने पर चुप्पी साध रखी लेकिन छोटे-छोटे बच्चों ने फिल्म देखने की बात स्वीकार की। पुलिस ने लैपटॉप, प्रोजेक्टर, अन्य उपकरण और संस्था से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिया है। एसपी बबीता साहू ने बताया है कि जांच में डाक्यूमेंट्री दिखाने की पुष्टि होने पर ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जीडी में तस्करा डालकर दोनों को छोड़ा गया है।
यह उसका निजी फैसला : छांव
छांव फाउंडेशन के सदस्य चेतन गुप्ता का कहना है कि डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग केतन ने व्यक्तिगत रूप से की है। चूंकि वह अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थक हैं, इसलिए स्क्रीनिंग के पक्षधर हैं। केतन ने वालंटियर होने के कारण संस्था का लैपटॉप का इस्तेमाल जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। बिना केस फाइल के पुलिस की इस कार्रवाई का संस्था विरोध करती है।