दिवाली से पहले एएसआई ने ताजमहल के मुख्य गुंबद में एक करोड़ रुपये लागत की स्टील की रेलिंग क्या लगाई, भारतीय सैलानियों पर यह आफत बनकर आई।
शाहजहां-मुमताज की कब्र वाले मुख्य गुंबद में लगी इस रेलिंग के कारण भीड़ प्रबंधन में शनिवार-रविवार और अन्य छुट्टियों के दिन मुश्किल आई तो एएसआई ने भीड़ प्रबंधन की जगह टिकट महंगा कर सैलानियों को रोकने की रणनीति तय कर ली।
एक अप्रैल से ताज का टिकट 200 रुपये करने का फैसला लिया गया, जबकि दो साल पहले यह महज 20 रुपये का था, जिसमें एडीए का 10 रुपये का पथकर शामिल है। अकेले एएसआई ने ताज का टिकट 20 गुना महंगा किया है।
एएसआई ने 1.02 करोड़ रुपये की लागत से ताजमहल के अंदर कब्र स्थल पर स्टील रेलिंग लगाई है। यह रेलिंग लगाई इसलिए गई थी कि पर्यटक ताज की दीवारें छू न सकें, लेकिन यह इतनी नजदीक है कि लोग दीवारों को छूते हुए ही निकलते हैं। यह रेलिंग बेअसर साबित हुई है।
सीआईएसएफ ने मंत्रालय स्तर पर रेलिंग को हटाने की मांग की, लेकिन एक करोड़ रुपये खर्च कर चुके एएसआई ने अपने बचाव में इसकी पैरवी की और नतीजा ये रहा कि ताज का दीदार करने वाले एक करोड़ सैलानियों को हर साल महंगे टिकट का झटका झेलना होगा।
दो साल पहले महज 20 रुपये में ताज का दीदार संभव था, जिसमें दस रुपये एडीए के और दस एएसआई के थे, लेकिन अब एएसआई का 200 रुपये का और एडीए का 10 रुपये का टिकट ताज देखने के लिए खरीदना होगा।
गलत है यह फैसला
आगरा टूरिज्म डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष संदीप अरोरा का कहना है कि गुंबद के अंदर रेलिंग हटाने से भीड़ प्रबंधन हो सकता है, लेकिन यह टिकट बढ़ोत्तरी का बहाना बन गया। गुंबद का टिकट 200 रुपये करने से सेंट्रल टैंक पर भीड़ ज्यादा रहेगी, क्योंकि अभी भीड़ बराबर हिस्सों में बंट जाती है, यह फैसला गलत है।
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संजीव जैन कहते हैं कि टिकट दर बढ़ाने से सैलानियों की संख्या में कमी आएगी, यह भ्रम है। न तो पहले ऐसा हुआ और न अब होगा। भीड़ प्रबंधन पर काम तो करना ही होगा, अलबत्ता एएसआई ने इस बहाने से ताज को दुधारू गाय जरूर बना दिया है।
एचआरओए के महासचिव नरेंद्र गुप्ता ने कहा कि ताज देखने वाला हर पर्यटक अमीर है, ऐसा सोचना गलत है। विद्यार्थियों, बेरोजगारों और किसानों के साथ ग्रामीण आदिवासी इलाकों के पर्यटक भी ताज देखने आते हैं। उनके लिए 200 का टिकट ज्यादा है। मंत्रालय को पुनर्विचार करना चाहिए।