आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि विभिन्न ठिकानों से मिले दस्तावेजों के जरिये 19 बैंक लॉकरों का पता चला है। इन सभी लॉकरों को फिलहाल सील करा दिया गया है ताकि इनको बिना विभाग की मंजूरी के कोई संचालित न कर सके। बिलों के आधार पर फैक्टरियों और नजदीकी टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज के मिलान करने पर पता चला है कि कई बड़ी खेप कभी फैक्टरी के बाहर ही नहीं निकली। सिर्फ कागजों पर डीलरों को माल सप्लाई दिखाकर लेनदेन दिखा दिया गया।
यही नहीं, कई फुटेज में माल फैक्टरी से निकलता और आसपास के टोल प्लाजा से पार होता दिखा लेकिन उस दिन कागजों में एक भी लेनदेन दर्ज नहीं किया गया। जाहिर है कि कागजी हेरफेर के जरिये मोटी कर चोरी की गई है। फिलहाल टीमें खरीदे गए कच्चे माल और सप्लाई के लिए भेजे गए माल का ब्यौरा तैयार करने में जुटी है। दोनों के अंतर के आधार पर टीमें अघोषित लेनदेन का आकलन कर उसके आधार पर आगे फैसला लेंगी।
बता दें, आयकर विभाग कानपुर जोन के प्रधान निदेशक (अन्वेषण) पीयूष कोठारी के निर्देश पर आयकर उप निदेशक हार्दिक अग्रवाल के नेतृत्व में आयकर अधिकारी हर्षवर्धन, रंजन सैनी, संजीव कुमार, सोहनलाल की टीमें आगरा निवासी कारोबारी कृष्ण मुरारी अग्रवाल, गोविंद व तरुण अग्रवाल, हरिशंकर अग्रवाल, जितेंद्र व वीरेंद्र अग्रवाल के आगरा, कानपुर, मथुरा, भरतपुर, अलीगढ़, गौतमबुद्ध नगर व दिल्ली समेत देशभर के 35 से ज्यादा आवासीय व व्यावसायिक ठिकानों पर जांच में जुटी हैं।