राम-रावण की भूमिका निभाने वाले पिता-पुत्र।
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राम का किरदार निभा रहे सागर बीकाम फाइनल ईयर में है। उनका कहना है कि जब तक मंचन चलता है। हम उसी किरदार में खुद को ढाल लेते हैं, जब यहां विदाई लेकर अपने घर पहुंचते हैं तो वहां हमारा शुद्धिकरण होता है। हवन, यज्ञ होता है। ब्राह्मण भोज होता है। जिस तरह भगवान राम ने ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए अश्वमेध यज्ञ किया था। उसी प्रकार हमें भी अपने घर पर शुद्धीकरण करना पड़ता है। पिता के साथ काम करने में कोई हिचक नहीं होती है।
यमुना शुद्धीकरण में जुटे हैं हनुमान
रामलीला में हनुमान का किरदार निभा रहे आनंद चतुर्वेदी गो सेवक हैं। इसके साथ वे यमुना शुद्धीकरण अभियान से जुड़े हैं। आनंद ने बताया कि मथुरा वृंदावन में सबसे पहले यमुना शुद्धि अभियान उनके गुरु अठलेश महाराज से प्रारंभ किया था। आनंद पिछले कई वर्षों से हनुमान का किरदार निभा रहे हैं।
रेलवे में नौकरी करना चाहते हैं शत्रुघ्न
रामलीला में शत्रुघ्न का किरदार निभा रहे शुभम चतुर्वेदी कक्षा नौ के छात्र हैं। वे पहली बार आगरा आए हैं। शुभम का कहना है कि मैंने सुना है कि आगरा की रामलीला में राम बारात का स्वरूप बहुत भव्य होता है। इसको लेकर मैं रोमांचित हूं। उन्होंने कहा कि अभी तो नौवीं कक्षा का छात्र हूं, लेकिन बड़ा होकर रेलवे में नौकरी करना चाहता हूं। उन्होंने यह भी कहा प्रभु की सेवा का यह कार्य जारी रखेंगे।
भरत की भूमिका निभा रहे सत्यम चतुर्वेदी ने माता सीता की भूमिका भी निभाई है। फिलहाल कुछ वर्षों से भरत का किरदार निभा रहे हैं। सत्यम का कहना है
कि रामलीला में भरत का चरित्र सर्वाधिक प्रेरणा दायक है। भगवान राम तो माता और पिता की आज्ञा के अनुसार राजगद्दी छोड़कर वनवास को गए थे, लेकिन भरत ने सब कुछ होते हुए भी राज पाठ त्यागकर त्याग का कीर्तिमान स्थापित किया था।
धैर्य और त्याग प्रतिमूर्ति हैं सीता
रामलीला में सीता का किरदार निभा रहे वैभव बेहद उत्साहित हैं। पिछली बार भी वैभव ने सीता की भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि आगरा जितना भव्य
कार्यक्रम कहीं नहीं होता है। जनकपुरी महोत्सव और रोमांचित करता है। सीता के चरित्र के विषय में वैभव कहते हैं माता सीता वसुंधरा की पुत्री हैं। धरती से
धैर्यवान कोई नहीं है। सीता माता में भी अपना माता के गुण हैं। वे न केवल धैर्य बल्कि त्याग की प्रतिमूर्ति हैं।