कासगंज में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपहरण का झूठा मुकदमा लिखवाने के मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने मुकदमा लिखवाने वाले को ही पांच साल की सजा सुनाई है। वहीं मामले के आरोपियों को बरी कर दिया। झूठे मुकदमे के दोषी पर जुर्माना भी लगाया है।
मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट धीरेंद्र कुमार के न्यायालय का है। बता दें कि कैलाश निवासी कादरबाड़ी सोरों ने 31 मई 2011 को थाने में मामला दर्ज कराया कि वह अपने पुत्र राजाबाबू के साथ बाइक पर अपने गांव वापिस लौट रहा था। तभी रास्ते में पांच लोगों ने उसकी आंखों पर पट्टी बांध कर ले गए।
उसको तो रिहा कर दिया, लेकिन उसके बेटे को अगवा कर लिया। उसने यादराम, रामवीर, हजारी निवासी कादरबाड़ी सोरों को नामजद कराया। जबकि दो लोगों को अज्ञात में रखा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपहरण की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। मामले की विवेचना की।
विवेचना में सामने आया ये
विवेचना में पुलिस ने कैलाश, मुन्ना लाल, रामपाल, राम गोपाल, पूजा के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय ने साक्ष्यों और अधिवक्ताओं की जिरह के आधार पर कैलाश को मिथ्या साक्ष्य गढ़ने का दोषी पाया। जबकि मुन्नालाल, रामपाल, रामगोपाल, पूजा के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हो पाया। जिससे इनको दोष मुक्त कर दिया।
जुर्माना नहीं अदा किया तो होगा ये
कोर्ट ने झूठा मुकदमा लिखवाने पर कैलाश को पांच साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 25 हजार का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान किया गया है।
जुर्माने की राशि में से 5-5 हजार रुपये की धनराशि यादराम, रामवीर व हजारी को प्रतिकर के रूप में प्रदान की जाएगी। जेल में बिताई गई सजा की अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।