फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्री पारस अस्पताल प्रकरण: व्हाटसएप ग्रुप पर चिकित्सकों की आपसी बातचीत से आईएमए की रार आई सामने, पढ़िए पूरी खबर

Fri, 25 Jun 2021 09:02 AM IST
Abhishek Saxena धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला, आगरा

सार

वरिष्ठ चिकित्सकों ने पदाधिकारियों पर लगाया आईएमए के मंच का निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करने का आरोप, चिकित्सकों ने क्लीनिक चलाने वालों की अलग एसोसिएशन बनाने तक की कर दी मांग 
विज्ञापन
श्री पारस अस्पताल प्रकरण: चिकित्सकों की व्हाट्सएप चैट आई सामने - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दमघोंटू मॉकड्रिल मामले में चिकित्सकों पर सवाल उठने से आईएमए में विरोध के स्वर फूटने लगे हैं। बड़े अस्पताल चलाने वाले डॉक्टरों पर निजी फायदे के लिए आईएमए के मंच का प्रयोग करने का आरोप लगाया जा रहा है। उबाल है इतना कि क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों ने अलग से एसोसिएशन बनाने तक की मांग कर दी।

विज्ञापन


श्री पारस अस्पताल में दमघोंटू मॉकड्रिल में कथित रूप से 22 मरीजों की मौत के प्रकरण से चिकित्सकों की निष्ठा पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले की जांच के लिए आईएमए की पांच सदस्यीय कमेटी भी बनी। इसमें से एक डॉ. डीवी शर्मा ने एक भी बैठक में भाग नहीं लिया, बुधवार को डॉ. शरद गुप्ता ने भी कमेटी से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद वरिष्ठ चिकित्सकों के निशाने पर आईएमए के पदाधिकारी आ गए। 

आईएमए के व्हाटसएप ग्रुप पर भड़ास निकालते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों ने सीधे तौर पर बड़े अस्पताल संचालकों पर अपने फायदे के लिए डॉक्टरों की लड़ाई कमजोर करने का आरोप लगाया। ग्रुप पर यहां तक लिखा गया कि बड़े अस्पतालों में ही विवाद होते हैं और आईएमए के मंच के जरिए नेतागिरी चमका कर निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं। कई मुद्दों पर आईएमए पदाधिकारियों की संदिग्ध भूमिका होने पर क्लीनिक और अस्पताल चलाने वालों की अलग-अलग एसोसिएशन बनाने की बात कही। अगर एक ही एसोसिएशन पर सहमति बनती है तो इसमें क्लीनिक चलाने वाला ही अध्यक्ष चुना जाए। 

विज्ञापन

श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
आईएमए के व्हाट्सएप ग्रुप पर चले मैसेज
- डीएम-एसएसपी के साथ उठक-बैठक हो जाएगी, तो अपना काम चलता रहेगा।
- क्यों न क्लीनिक चलाने वालों की एसोसिएशन अलग हो, सोचिए ज्यादातर विवाद अस्पताल में होते हैं न कि क्लीनिक पर, लेकिन बदनामी 1500 क्लीनिक वालों की होती है।
- क्लीनिक और अस्पतालों की समस्याएं एकदम अलग होती हैं, सो अपनी-अपनी निपटाएं। 
-अगर अस्पताल वाले चाहते हैं कि दोनों की एक एसोसिएशन हो तो अध्यक्ष हमेशा क्लीनिक चलाने वाला ही होना चाहिए।
- एक समय बड़े अस्पताल वाले और लीडिंग प्रैक्टिसनर्स आईएमए की बैठक में आना या चुनाव लड़ना तौहीन समझते थे, अब ज्यों ही सरकारी शिकंजा अस्पतालों पर कसता जा रहा है, शिकायतें बढ़ रही हैं तो आईएमए का मंच इस्तेमाल कर सरकारी तंत्र पर धाक जमाने के लिए चुनाव लड़कर पदासीन होने लगे। बड़े अस्पताल वालों का लगता है कि आईएमए का पद मिलने पर नेतागिरी चल निकलेगी और सीएमओ भी परेशान नहीं करेगा।
 
विज्ञापन

डॉक्टरों ने उठाए सवाल
- अप्रैल में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, बोर्ड भी टांगे, मरीज-तीमारदार भुगतभोगी हैं, तो फिर आईएमए इस बात को मजबूती से प्रशासन के सामने क्यों नहीं उठाती।
- एक बारगी मान लिया जाए श्री पारस अस्पताल में मॉकड्रिल हुई भी तो इसकी वजह ऑक्सीजन की कमी ही रही होगी, वरना क्यों कोई चिकित्सक ऐसा कदम उठाएगा। 
- अस्पताल सील हुआ, मुकदमा भी दर्ज हुआ, लेकिन प्रशासन की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई, ऐसे में तीसरी लहर में फिर से पूरा दोष चिकित्सकों पर ही डाला जाएगा।
- अस्पताल में भर्ती रहे 91 मरीजों के परिजनों के बयान दर्ज हुए, क्योंकि परिजन भी खुद बयान कर देंगे कि ऑक्सीजन की कमी थी, इससे प्रशासनिक पोल खुलेगी।

श्री पारस अस्पताल: आखिर किसने दोबारा खुलवाया अस्पताल, जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के जवाबों से सभी हैरान 
श्री पारस अस्पताल प्रकरण: ये कैसी जांच...पुलिस ने अब तक कब्जे में नहीं ली डीवीआर
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें