इन चारों पतों पर जानकारी की गई तो यहां पर सर्जिकल सामान का व्यापार नहीं होता था और कोई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी नहीं पाई गई। चारों पतों के नाम पर आरोपी गढ़ी भदौरिया में ही फैक्टरी में माल तैयार कराता था। इन पर चारों मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की मुहर लगाकर बाजार में सप्लाई करता था।
कच्चा माल कोयंबटूर और पैकिंग का सामान अहमदाबाद से मंगवाता
औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा ने बताया कि फैक्टरी में कोयंबटूर और अहमदाबाद के बाउचर मिले हैं। जांच में पता चला कि आरोपी कोयंबटूर से सर्जिकल सामान का कच्चा माल और अहमदाबाद से पेपर फॉइल समेत पैकिंग का सामान खरीदता था। इन सभी से यहीं पर सर्जिकल सामान तैयार करता था।
यह लिखा था पता
सर्जिकल ग्लव्स : शास्त्रीपुरम लखनपुरा इंडस्ट्रियल एरिया
नैबुलाइजेशन मास्क: मारुति प्लाजा संजय प्लेस
सर्जिकल ड्रेसिंग: सेक्टर 11, ग्रेटर नोएडा
कैथेटर: घोलवाड फाली, दमन
मल्टीनेशनल कंपनी बताकर करता था मोटी कमाई
औषधि निरीक्षक ने बताया कि आरोपी ने मेडिकेयर हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड को मल्टीनेशनल कंपनी बताकर डेढ़ साल में मोटी कमाई की। इसने दमन, ग्रेटर नोएडा और आगरा में दो निर्माण कंपनियां दर्शाकर बाजार में पैठ बनाई। इसके खरीददार भी इसके झांसे में आने लगे और सामान की खरीद करने लगे।
कोरोना वायरस के मरीज बढ़ने पर इसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, मध्यप्रदेश, कर्नाटका और गुजरात से भी ऑर्डर मिलने लगे। इनको सीधे और एजेंटों के जरिये सप्लाई करने लगा। एजेंटों के लिए कमीशन तय था।
400 रुपये रोजाना में 12 घंटे करवाता था कार्य
औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा ने बताया कि फैक्टरी चार मंजिला थी, बेसमेंट में कच्चा माल और कार्टन भरे हुए थे। यहां करीब 60 महिलाएं पैकिंग के कार्य में लगी थी।
महिलाओं से पूछने पर बताया कि 400 रुपये रोजाना के हिसाब से मिलते हैं, जिसमें सैनेटरी नैपकिन, मास्क, ग्लव्स समेत अन्य सर्जिकल सामान तैयार कर पैकिंग करते थे। यह गरीब तबके की महिलाएं थी और 12 घंटे तक कार्य करती थी। इनके आने के बाद फैक्टरी में बाहर से ताला लगा दिया जाता था