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ताजनगरी में भी छलक रहे 'मौत के प्याले', ऐसे बेची जा रही अवैध शराब

Thu, 30 May 2019 01:31 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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कच्ची शराब बनाने के ठिकाने पर कार्रवाई करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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बाराबंकी में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद प्रदेश सरकार हरकत में आई और सभी जिलों में अभियान चलाने के सख्त निर्देश दिए। आगरा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची शराब बनाने का धंधा होती है, जिसके खिलाफ पुलिस अभियान चला रही है। 
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मंगलवार को शमसाबाद क्षेत्र में कई भट्ठियां धधकती मिलीं थीं, लेकिन यह गोरखधंधा इतना भर नहीं है। यहां बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनाई जा रही है। बोतलों पर देसी और अंग्रेजी शराब के ब्रांड के लेबल लगाकर इस अवैध शराब को बेचा जा रहा है।

पिछले साल इसका खुलासा हुआ था। यमुना पार में फैक्ट्री पकड़ी गई थी। रसूखदार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दबाव में आकर पुलिस ने मुख्य आरोपी को क्लीनचिट दे दी।
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पिछले साल हुआ यह खुलासा

पिछले साल ही यह खुलासा हुआ था कि कई जगह हरियाणा की बताकर अवैध शराब बेची जा रही है। लोग इसे सस्ती समझकर ले लेते हैं। सोचते हैं कि सिर्फ टैक्स चोरी की बात है लेकिन मामला इतना भर नहीं है। यह शराब जहरीली है।

वैसे, यहां तस्करी की शराब भी बड़े पैमाने पर आती है। हरियाणा ,मध्य प्रदेश और राजस्थान से जिले की सीमा लगती है। यहां से शराब आ रही है। आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश तक से शराब लाई जा रही है।

जांच में पता चला है कि अवैध शराब में नींद की गोलियां, यूरिया, ऑक्सीटोसिन (हार्मोन), नौसादर, वाशिंग पाउडर के इंजेक्शन मिलाए जा रहे हैं। इसी से वह जहरीली हो रही है। कई सैंपल में मिथाइल एल्कोहल पाया गया है। 

कफ सीरप का इस्तेमाल भी नशे के लिए किया जा रहा है। कई कफ सीरप जो सस्ते हैं। उसे लोग नशे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इनसे भी सेहत का खतरा है। इन सीरप के खिलाफ बोदला में महिलाएं धरना प्रदर्शन तक कर चुकी हैं।
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