वृंदावन में लगा पुलिस द्वारा लगाया गया बोर्ड
'मंदिर जाना है तो सौ रुपये देना, अच्छे से घुमाएंगे, प्रमुख मंदिरों के दर्शन भी कराएंगे'। यदि आप वृंदावन के मंदिरों के दर्शन करने आ रहे हैं तो जरा संभलिए। मार्ग में जगह-जगह खड़े लपके आपको यह कहते हुए सुनाई दे सकते हैं।
इनके चंगुल में फंसे तो इसका खामियाजा आपको चढ़ावे के रूप में मोटी रकम देकर चुकाना पड़ सकता है। ताज्जुब इस बात का है कि चढ़ावे की कुल रकम की करीब 80 फीसदी रकम इन लपकों के ही हिस्से में आ जाती है। इनसे बचने के लिए पुलिस ने भी जगह-जगह बोर्ड लगा रखे हैं।
तीर्थ नगरी वृंदावन में यूं तो करीब साढ़े पांच हजार से अधिक मंदिर हैं, लेकिन करीब 50 मंदिर ऐसे हैं जहां श्रद्धालु भारी तादाद में दर्शन को आते हैं। इस्कॉन, प्रेम मंदिर, बिहारी जी, निधिवन, रंगजी मंदिर के अलावा मथुरा व छटीकरा रोड पर खड़े लपके पहले तो आपकी गाड़ी में हाथ देकर रोकेंगे।
अगर गाड़ी रुकी तो मात्र 100 रुपये में दर्शन कराने का हवाला देते हुए आपको अपनी बातों में फंसाएंगे। यदि आप फंसे तो आपकी जेब हल्की होना लाजिमी है। इतना ही नहीं इनके चक्कर में आप आए तो प्रमुख मंदिर के दर्शन से भी वंचित रह सकते हैं।
ऐसे करते आस्था के नाम पर खेल
नगर के प्रमुख मंदिरों में घुमाने के बाद असली खेल शुरू होता है। यहां करीब 12 से अधिक नंद राय मौजूद हैं, इन्हें ही नंद महल कहा जाता है। अंत में लपके यात्रियों के दल को लेकर यहां पहुंचते हैं।
यहां गो-सेवा, गरीब बच्चों की शिक्षा, गरीब लड़कियों की शादी एवं निराश्रित महिलाओं की सेवार्थ आदि की बातों से उनके मन को डायवर्ट कर तरह-तरह के संकल्प दिलाए जाते हैं और मोटा दान लिया जाता है।
एटीएम व चेक से भी होता है चढ़ावा
श्रद्धालुओं को कैसे भी नंद महलों में ले जाया जाए, इसके लिए यह लपके तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। ये भक्तों से झूठ बोलने से भी नहीं कतराते। चढ़ावे के लिए नकद राशि के अलावा क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, चेक, मनी ट्रांसफर आदि की व्यवस्था भी इन नंद महलों में होती है। इसका भुगतान दो या तीन दिन में लपकों को दे दिया जाता है।