आरोपियों के बारे में जानकारी देते पुलिस अधिकारी।
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आगरा के कागारौल थाना क्षेत्र के अकोला गांव में आरओ प्लांट की आड़ में नकली शराब बनाने की फैक्टरी पकड़ी गई। पुलिस ने तीन आरोपियों को कार में सप्लाई के लिए माल ले जाते समय गिरफ्तार किया। पुलिस को फैक्टरी पहुंचता देख चौथे ने स्प्रिट से भरे ड्रम में आग लगा दी। उसे भी पकड़ लिया गया। भारी मात्रा में नकली शराब और अन्य सामान बरामद किया गया है।
एडीसीपी सिटी आदित्य कुमार ने बताया कि पुलिस को तस्करों के नकली शराब लेकर जाने की सूचना मिली थी। अकोला के लालऊ पुल के पास बिना नंबर की काले रंग की कार को रोक अछनेरा के रायभा के मंगुर्रा गांव के नरेश, उसके भाई उम्मेद सिंह और न्यू आगरा के नगलापदी निवासी प्रशांत को गिरफ्तार किया गया।
कार से 74 पेटी में इंपीरियर ब्लू ब्रांड के 3552 क्वार्टर नकली शराब बरामद हुई। निशानदेही पर अकोला में सत्यप्रकाश के घर पर छापा मारा गया। पुलिस को देखते ही सत्यप्रकाश ने शराब बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली स्प्रिट के ड्रम में आग लगाकर सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस टीम ने आग बुझाई और मौके से 50 लीटर स्प्रिट, 89 खाली बोतलें, एक बोरी भर के ढक्कन बरामद किए।
बिहार और एमपी में भेजनी थी शराब
पूछताछ में आरोपी नरेश ने बताया कि वह पूर्व में राजस्थान में नकली शराब बनाने के मामले में पकड़ा गया था। छूटने के बाद हरियाणा,पलवल के हूंडल निवासी धर्मवीर से मुलाकात हुई। धर्मवीर ने खाली बोतलें, ढक्कन, सील और लेबल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली। इसके बाद उसने अपने भाई उम्मेद और साले प्रशांत के साथ नकली शराब बनाने की सोची। अकोला के नगला कमाल के निवासी कृष्णा के जरिये सत्यप्रकाश से मुलाकात हुई। सत्यप्रकाश अपने खेतों में बने मकान में फैक्टरी और गोदाम बनाने को राजी हो गया।
किसी को शक नहीं हो, इसके लिए उसने घर में आरओ प्लांट लगवाया। सात दिन पहले उन्होंने नकली शराब तैयार करना शुरू किया। आसपास के गांवों में थोड़ा माल बेचा, इसके बाद बड़ी सप्लाई के लिए ग्राहक ढूंढने लगे। सत्यप्रकाश ने अपने बेटे सौरभ को ग्राहक की तलाश में बिहार और दूसरे बेटे शिवशंकर को मध्यप्रदेश भेजा था। मंगलवार रात वह तैयार माल को बेचने के लिए ले जा रहे थे, तभी पुलिस ने पकड़ लिया।
असली में मिलाते थे स्प्रिट
आरोपी नरेश पूर्व में राजस्थान में शराब की दुकान में काम कर चुका था। उसको शराब में मिलावट करना अच्छे से आता था। नरेश ने बताया कि एक लीटर स्प्रिट में वह एक बोतल (750 एमएल) असली शराब मिलाते थे। इसके बाद उसमें रंग और पानी मिलाकर नकली मिलावटी शराब तैयार करते थे। तैयार माल को लेबल लगी बोतलों में भरने के बाद उसपर नया ढक्कन और सील लगाकर पेटियों में रखकर सप्लाई करना था। इस नकली शराब को पीने वालों को लीवर, कैंसर, हाई ब्लडप्रेशर और हृदय संबंधी रोग हो सकते थे। स्प्रिट की अधिकता हाेने से शराब जहरीली भी हो सकती थी।
भागे लोगों की हो रही तलाश
सर्विलांस, एसओजी और थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नकली शराब बनाने वाले पकड़े गए हैं। भागे आरोपियों की तलाश की जा रही है। -एडीसीपी सिटी आदित्य कुमार