आगरा। राजा मंडी बाजार स्थित लाभचंद मार्केट में दशकों से काबिज अतिक्रमण गाज गिरना तय है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद संयुक्त टीम द्वारा गई सड़क की पैमाइश में अवैध निर्माण के पुख्ता संकेत मिले हैं। जांच में प्रथम दृष्ट्या फुटपाथ और सड़क की जमीन पर होटल धर्मलोक और चंद्रलोक खड़े मिले हैं। ऐसे में अब अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चल सकता है।
लाभचंद मार्केट का पट्टा 1947 में लाल धर्मचंद जैन को मिला था। मूल पट्टाधारक से पट्टा पहले विनय चंद, श्रीचंद और मिलाप चंद जैन को हस्तांतारित हुआ। फिर विनय चंद जैन के पुत्र सुदीप जैन और प्रदीप जैन काबिज हो गए। विवादित भूमि पर करीब 69 दुकानें बन गईं। फुटपाथ पर पिलर खड़े कर ऊपर होटल संचालित हैं। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद 79 साल बाद नगर निगम और जिला प्रशासन जागा है। आरोप है कि सड़क के तथ्यों को छिपाकर पट्टाधारक ने न केवल अवैध निर्माण किया, बल्कि वहां अवैध व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरू संचालित कीं। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, जिस स्थान पर बहुमंजिला निर्माण खड़े हैं, वह कागजों में पक्की सड़क और रास्ता दर्ज है। पट्टे की शर्तों के खुले उल्लंघन पर निगम ने पहले ही इस पट्टे को निरस्त कर चुका है।
आंख मूंदे रहे अफसर, बिक गई सड़क
वर्ष 1947 से अब तक नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारी इस बेशकीमती जमीन पर हुए अतिक्रमण को लेकर कुंभकर्णी नींद में सोए रहे। मामला तब खुला जब एक दुकानदार किराया विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सड़क की स्थिति की जांच के आदेश दिए और स्पष्ट किया कि यदि वह जमीन सड़क की है, तो तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए।
आगे की राह: ध्वस्तीकरण की तैयारी
अब लाभचंद मार्केट का भविष्य पूरी तरह से जांच रिपोर्ट पर निर्भर है। प्रशासन के सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो सकती है। इससे न केवल राजा मंडी की संकरी सड़क चौड़ी होगी, बल्कि दशकों से जाम झेल रहे बाजार को राहत मिलेगी। इस आहट से ही व्यापारियों में खलबली मची है। एक तरफ कुछ दुकानदार इसे कानून की जीत बता रहे है, जबकि कुछ का कहना है कि ध्वस्तीकरण से रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
निगम से मिलीं अनुमतियां
- होटल का लाइसेंस नगर पालिका से मिला था। फुटपाथ पर खड़े पिलर नक्शे में शामिल हैं। नगर निगम से सभी अनुमति ली गई थीं। एक पक्षीय कार्रवाई उचित नहीं। पट्टा निरस्तीकरण को न्यायालय में चुनौती दी गई है। - प्रदीप जैन पुत्र विनय चंद जैन