दिल्ली के डॉ. ललित मेंहदीरता ने कहा कि घरों में पेटीज, चाऊमीन, बर्गर, पैकेट-डिब्बा बंद भोजन और शीतलपेय का चलन तेजी से बढ़ा है। इनमें कई तरह के केमिकल होते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर में जमा हो रहे हैं। दाल, हरी सब्जी, फल-सलाद समेत स्वस्थ भोजन से दूरी और खेलकूद भी कम होने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। करीब 32 फीसदी में तय वजन से कम है, 35 फीसदी में बौनेपन के लक्षण हैं, करीब 20 फीसदी में ये दोनों दिक्कतें मिल रही हैं।
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गुरुग्राम के डॉ. अजय अरोड़ा ने बताया कि फास्ट फूड से बच्चों में मोटापा, मांसपेशियां कमजोर मिल रही हैं। आईपीए के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने ऐसे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है। सचिव डॉ. राहुल पेंगोरिया ने टीकाकरण का महत्व बताया। कहा कि ये संक्रमण और बीमारियों से बचाता है। कार्यशाला में डॉ. राकेश भाटिया, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. स्वाति द्विवेदी, डॉ. आरएन शर्मा, डॉ. राजीव कृषक, डॉ. संजय सक्सेना, डॉ. युवराज सिंह आदि ने भी व्याख्यान दिए।