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कोप कहर बनकर टूटे तो कालिंदी को दोष मत देना

Sun, 29 May 2016 01:12 AM IST
अमर उजाला आगरा
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काल‌िंदी - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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कभी कल-कल बहने वाली कालिंदी वर्तमान में नाला जैसी दिखती है। मौसम विभाग इस बार औसत से अधिक बारिश की भविष्यवाणी कर चुका है। ऐसे में अगर बाढ़ आई तो कालिंदी हजारों लोगों पर कहर बनकर टूटेगी। रेत के ढेर पर खड़े गगनचुंबी भवन और मकान उफनाती नदी का मुकाबला नहीं कर पाएंगे, इसमें संदेह है।
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शहर में यमुना अपनी दोनों बांहें फैलाकर प्रवेश करती हैं। रुनकता पर इसके किनारे खुले दिखते हैं। कैलाश घाट तक स्थिति ठीक है। मगर, इससे आगे यमुना किनारे कंकरीट का जाल बिछ गया है। दयालबाग क्षेत्र में कई मल्टीस्टोरी बिल्डिंगें तो इसके बहाव के बीच ही विकसित कर दी गई हैं। पोइया घाट से हाथीघाट तक कमोबेश ऐसी ही हाल है। नदी के मोड़ वाले स्थानों पर भी कालोनियां और इमारतें बन गई हैं। ऐसे में यदि जलस्तर बढ़ता है तो लहरें सीधा इन्हीं से टकराएंगी। शहरवासी वर्ष 1995 और 2010 की बाढ़ में इसका नजारा देख चुके हैं। पानी का वेग जितना होगा, संकट भी उतना ही बड़ा होगा और नुकसान भी। ऐसे में जाहिर है, दोषी कालिंदी नहीं, वह व्यवस्था होगी जिसके कारण नदी से उसके किनारे छीने गए।
495 फुट है यमुना का मानक फ्लड लेवल
499.3 फुट पहुंचा था वर्ष 2010 में जलस्तर
40 से अधिक कालोनियां व गांव डूब क्षेत्र में
22 किमी जिले की सीमा से गुजरती है यमुना

बाढ़ में डूबे थे ये इलाके
मनोहरपुर, नगला बूढ़ी, महताब बाग, अमर विहार, कैलाश, पवन विहार, गढ़ी जीवनराम, विनोद विहार, भगवती बाग, राधा नगर, इस्लाम नगर, खलियाई मंडी, इंद्रा नगर, अनुराग नगर, कन्हैया नगर, रजवाड़ा, लोहिया नगर, जसवंत सिंह की छतरी, सीता नगर, न्यू राधा नगर, कृष्णा कालोनी।
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ऐसी हुई थी हालत
पहले खेत डूबे, फिर घरों में घुसने लगी थी बाढ़
गोकुल बैराज से आया 1.15 लाख क्यूसेक पानी
मनोहरपुर एसटीपी में पानी भरा, फसलें हईं बर्बाद
ताज परिसर, एत्माद्दौला में बारादरी तक घुसा पानी
ताजगंज स्थित मोक्षधाम डूब गया था इस बाढ़ में

एनजीटी में चल रही सुनवाई
यमुना को मूलस्वरूप में लाने के लिए पिछले एक साल से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सुनवाई चल रही है। ट्रिब्यूनल में दायर जनहित याचिका में यमुना किनारे हुए निर्माणों को हटाने की मांग की गई है। नदी किनारे सबसे ज्यादा निर्माण दयालबाग क्षेत्र में हुए हैं।


केदारनाथ जैसे हालात यहां भी बन सकते हैं। वहां भी नदी के पानी की राह में रोड़े खड़े किए गए थे, यमुना किनारों पर भी ऐसी ही स्थिति है। पानी को रास्ता न मिला तो वह इसकी जगह बनाएगी, भुगतना लोगों को पड़ेगा। डूब क्षेत्र पूरी तरह से खाली कराया जाना चाहिए।
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- डीके जोशी, सदस्य, सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी

बाढ़ का खतरा तो बना ही रहता है। 2010 में भी हालात काफी गंभीर थे। बारिश के दिनों में बाढ़ चिंता का विषय बनी रहती है।
- हरीओम खंडेलवाल, निवासी, बल्केश्वर 
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