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Agra News: खूंटी पर टंगे मानवाधिकार... कहीं उखाड़े नाखून, कहीं तोड़ी हड्डियां

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मंडलायुक्त सभागार में जन सुनवाई करते मानवाधिकार आयोग सदस्य स्त्रोत अमर उजाला
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आगरा। पुलिस थानों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व व अन्य दफ्तरों में मानवाधिकार खूंटी पर टंगे हुए हैं। कहीं पानी का कनेक्शन नहीं मिल रहा तो कहीं इलाज। कोई पेंशन के लिए परेशान है तो कोई आवास के लिए। कहीं पुलिस ने नाखून उखाड़ लिए तो कहीं मारते-मारते हड्डियां तक तोड़ दीं। ये शिकायतें बृहस्पतिवार को मंडलायुक्त कार्यालय में राज्य मानवाधिकार की जनसुनवाई में सामने आई।
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मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों पर बृहस्पतिवार को पूर्वाह्न 11 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश राजीव लोचन मेहरोत्रा और सदस्य के रूप में पूर्व पुलिस अपर महानिदेशक बृजभूषण ने मैराथन सुनवाई की। एक-एक मामले में आयोग ने संबंधित पुलिसकर्मियों और अधिकारियों से जवाब-तलब किए।
सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस उत्पीड़न से संबंधित थीं। एक पीड़ित ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके नाखून उखाड़ लिए। हिरासत में यातनाएं दीं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आदेश पर पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। पुलिस का कहना था कि पीड़ित की मेडिकल रिपोर्ट में दम नहीं।
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पीड़ित सोनू शर्मा ने आयोग को बताया कि किरावली पुलिस ने उसके साथ बर्बरता की। पूछताछ के बहाने हिरासत में इतना मारा कि उसके पैरों की हड्डियां तक तोड़ दीं। शिकायत पर भी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। आवास, पानी कनेक्शन, इलाज नहीं मिलने व अन्य मामलोें के पीड़ित भी आयोग के सामने पेश हुए।
इन विभागों में भी हो रहा उल्लंघन
- आयोग की सुनवाई में पुलिस के अलावा नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला पंचायतराज अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, राजस्व आदि विभागों के अधिकारियों के दफ्तरों में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले दर्ज हुए हैं। वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 170 से अधिक शिकायतें आगरा से आयोग में पहुंची हैं।
पीड़ितों के लिए मांगा मुआवजा
- युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव लोचन मेहरोत्रा से मिला। पुलिस की बर्बरता के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की गई। अधिवक्ताओं ने कहा कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस निरंकुश हो गई है। थाना, चौकियों से लेकर अधिकारियों के दफ्तरों तक में मानवाधिकार का मखौल उड़ रहा है।
आज पढ़ाया जाएगा जागरूकता का पाठ
- शुक्रवार को आयोग के सदस्य सभी विभागों के अधिकारियों के साथ मंडलायुक्त सभागार में बैठक करेंगे। इस पाठशाला का मकसद अधिकारियों को यह समझाना है कि कुर्सी जनसेवा के लिए है, उत्पीड़न के लिए नहीं। उन्हें मानवाधिकार के प्रति जागरूक किया जाएगा। अधिवक्ता केसी जैन ने बृहस्पतिवार को आयोग के समक्ष हिट एंड रन मामलों जांच और लंबित मामलों के निस्तारण में लापरवाही का मुद्दा उठाया।
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