पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह नहीं रहे। 92 साल की उम्र में उनका दिल्ली एम्स में निधन हो गया। उन्होंने हमेशा देश के सम्मान और समृद्धि को वरीयता दी। यही वजह है उन्हें आर्थिक सुधारों के नायक की उपाधि से नवाजा गया।
सरल, सौम्य और सहज स्वभाव के धनी पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के मन को पद्म विभूषण अवार्ड भी नहीं मोह सका था। उन्होंने हमेशा देश के सम्मान और समृद्धि को वरीयता दी। यही वजह है उन्हें आर्थिक सुधारों के नायक की उपाधि से नवाजा गया। जब भी आर्थिक सुधारों की बात आती है तो उनका नाम सबसे पहले लिया जाता है।
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अमर उजाला के 28 जनवरी, 1987 के अंक में छपी खबर के अनुसार, मनमोहन सिंह पेरू के राष्ट्रपति डॉ. एलेन गार्सिया पेरेज के साथ आगरा ताजमहल देखने आए थे। उन्होंने ताज की खूबसूरती को काफी देर तक निहारा। पेरू के राष्ट्रपति भी विश्व की नंबर वन धरोहरों में शुमार ताज की तारीफ किए बिना नहीं रह सके।
इसके बाद मीडिया के साथ रूबरू हुए। उन्हें आगरा दाैरे के कुछ माह पहले ही पद्म विभूषण मिला था। अमर उजाला से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उन्हें पद्म विभूषण पाकर कैसा लगा तब उन्होंने कहा, पद्म विभूषण मिलने से क्या फर्क पड़ता है। देश के लिए काम जरूरी है। उस समय वो योजना आयोग के उपाध्यक्ष थे और देश के लिए अर्थ नीतियां बना रहे थे।
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आगरा में डाॅ. मनमोहन सिंह और पेरू के राष्ट्रपति डॉ. एलेन गार्सिया पेरेज की जनवरी में हुई इस मुलाकात के तीन महीने बाद ही कांग्रेस में भूचाल आ गया था। राजीव गांधी उस समय प्रधानमंत्री थे।