संकट ग्रस्त प्रजाति में सुमार इंडियन हॉर्नबिल चिड़िया का प्रजनन काल पर्यटकों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है। प्रजनन काल (अप्रैल से जून ) शुरू होते ही इंडियन हॉर्नबिल चिड़िया पेड़ की डाल पर कोटर बनाने लगी हैं, जिसकी आवाज इन दिनों बीहड़ के पेडों पर आवाज सुनाई देती है। कोटर में मादा अंडे देने के बाद मिट्टी की दीवार बनाकर खुद को बंद कर लेती हैं।
वनकर्मी और पक्षियों के जानकार नंदराम ने बताया कि मादा हॉर्नबिल कोटर में चार से छह अंडे देती हैं। अंडे देने के बाद मिट्टी की दीवार बनाकर खुद को बंद कर लेती हैं। दीवार में बस चोंच जाने लायक छेद छोड़ती हैं। नर इन्हें भोजन उपलब्ध कराते हैं। अंडों से 15-20 दिन में बच्चे निकलते हैं। करीब एक फुट की लंबाई वाले इंडियन हॉर्नबिल एशिया, अफ्रीका, मलेशिया आदि में ही दिखते हैं। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड ने बताया कि पक्षियों की तमाम प्रजातियों के बीच इंडियन हॉर्नबिल की मौजूदगी उत्साह वर्धक है।
भोजन के रूप में लेते है फलों का गूदा
आमतौर पर इंडियन हॉर्नबिल सर्वभक्षी हैं, लेकिन प्रजनन काल में नर भोजन के रूप में फलों का गूदा ही मादा तक पहुंचता है। अण्डे से निकलने के बाद चूजे का भी यही भोजन होता है। नर की आंखें लाल और मादा की आंखें नीली होती हैं। मादा नर से आकार और पैर में कुछ छोटी होती है।
जंगल के किसान
रेंजर ने बताया कि इंडियन हॉर्नबिल को जंगल के किसान के रूप में भी जाना जाता है। कई फलों के पेड़ों के बीजों को फैलाने में उनकी भूमिका के कारण इन्हें ये नाम दिया गया है। बीजों से जंगल में पौधों को पुनर्जीवित करने में मदद मिलती है।