कोरोना वायरस की दूसरी लहर में कहर बरपा। कई लोगों की मौत हुई। इसके बाद लोगों ने टीके का महत्व समझा। तेजी से टीकाकरण हुआ। इसका असर कोरोना वायरस की तीसरी लहर में दिखा। टीके की डोज के कारण ओमिक्रॉन बेअसर रहा, मरीजों की जान बची।
टीका लगा नहीं और फोन पर बधाई का संदेश भी आ गया। शुरुआती दौर में रोजाना 25-30 ऐसे मामले आ रहे थे। शिकायत के बाद इनका दोबारा से पंजीकरण कराते हुए टीका लगवाया। अब इक्का-दुक्का ही ऐसी शिकायतें मिल रही हैं।
एसएन में ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभागाध्यक्ष डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि कोरोना की वैक्सीन लगवा चुके करीब 3,250 लोगों की एंटीबॉडी की जांच की। टीके की दोनों खुराक लगने के बाद वायरस से बचाव के लिए सुरक्षा कवच बन गया। जब इनकी रक्त की जांच की तो इनमें स्पाइक एंटीबॉडी का स्तर 130 से 250 तक मिला।
जिला टीकाकरण प्रभारी डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि जिले में 1.43 लाख गर्भवती महिलाओं का भी टीकाकरण हो गया है। इनके लिए सीएचसी मातृत्व दिवस पर अलग से व्यवस्था की गई। जिले में 7.58 लाख बच्चों का पोलियो-नियमित टीकाकरण भी कराया।
सकेत कॉलोनी निवासी अमरीश अग्रवाल ने बताया कि दूसरी लहर में मुझे कोरोना हो गया था। एसएन में भर्ती रहा। ठीक होने के बाद वैक्सीन लगवाई। तीसरी लहर में फिर परेशानी हुई, लेकिन घर में ही ठीक हो गया। वैक्सीन से ही जान बची। वहीं जयपुर हाउस के रहने वाले सुनील जैन ने कहा कि पहली लहर में कोरोना से संक्रमित हो गया था। बाद में टीका लगवा लिया। टीका लगवाने के बाद एंटीबॉडी बन गई थीं, जिस कारण तीसरी लहर से बचाव हुआ।
कमला नगर निवासी राघव अग्रवाल ने कहा कि कोरोना वायरस का टीका मेरे घर में सभी ने लगवा लिया। बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ तो मेरे मम्मी-पापा के साथ बूथ पर जाकर टीका लगवाया। हल्का सा बुखार आया, कोई परेशानी नहीं हुई। दयालबाग की अदिति सिंह ने कहा कि स्कूल में टीका लगवाने के लिए कहा गया था, लेकिन हमारे घर में पहले से ही टीका लग गया था, सो कोई डर जैसी बात ही नहीं थी। टीका लगवाने के बाद अपने साथियों को भी जागरूक किया।