आगरा। कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। इसकी चपेट में 25-30 की उम्र के युवा भी आ रहे हैं लेकिन इसमें होम्योपैथी कारगर हो रही है। रेडियो-कीमोथेरेपी से मरीज पर होने वाले दुष्प्रभाव भी होम्योपैथिक दवाओं से ठीक हो रहे हैं। बाग फरजाना स्थित होम्योपैथिक रिसर्च सेंटर में सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के शुभारंभ पर सोमवार को अंतरराष्ट्रीय होम्योपैथिक संघ के पहले भारतीय अध्यक्ष डॉ. आलोक पारीक व्याख्यान देते हुए ये बातें कहीं।
होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. आदित्य पारीक ने बताया कि थायरायड, लिवर, हेपेटाइटिस बी और सी, मानसिक विकारों में भी होम्योपैथी कारगर है। होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. नीतिका पारीक ने बताया कि स्त्री रोग, बांझपन और थायरायड ग्रंथि के रोगों में होम्योपैथी से बेहतर परिणाम सामने आए हैं। सेमिनार के दूसरे सत्र में प्रशिक्षुओं को कैंसर, लिवर, थायरायड समेत अन्य मर्ज से जूझ रहे मरीजों में होम्योपैथी के असर की केस स्टडी के साथ जानकारी दी गई। पद्मश्री डॉ. आरएस पारीक ने सेमिनार का शुभारंभ किया।
ये बोले प्रशिक्षु:
होम्योपैथी के दुष्प्रभाव नहीं
- होम्योपैथी के दुष्प्रभाव नहीं हैं। इसका उपयोग दुनिया में बढ़ रहा है। गंभीर रोगों में कैसे होम्योपैथी कार्य करती है। इसका क्या परिणाम हैं। इसके बारे में कार्यशाला में जानकारी मिली। एलेक्जेंड्रा, रूस
गंभीर रोगों में असर को जाना
होम्योपैथी गंभीर और दुर्लभ रोगों में भी असरदार साबित हो रही है। ये सस्ती और कारगर है। कार्यशाला में गंभीर रोगों में होम्योपैथी के असर के बारे में जानने को मिला। - टी. इलेरी, तुर्किये
होम्योपैथी पर बढ़ रहा भरोसा
- होम्योपैथी के बेहतर परिणाम को देखते हुए लोगों का भरोसा बढ़ा है। कार्यशाला में केस स्टडी के साथ अस्पताल का विजिट कराते हुए मरीजों से भी इसके बारे में जाना है। - लियोविड, रूस
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कई देशों के चिकित्सक हुए शामिल
डॉ. आलोक पारीक ने बताया कि सेमिनार में जर्मनी, रूस, तुर्किये और आस्टि्रया से 40 चिकित्सक शामिल हुए। इनमें अधिकांश एलोपैथी के हैं। 9-15 फरवरी तक चलने वाले सेमिनार में होम्योपैथी से कैंसर, किडनी, लिवर, थायरायड, हेपेटाइटिस समेत अन्य मर्ज पर असर और मरीजों की केस स्टडी बताई जाएगी।