कासगंज के गंजडुंडवारा में आसरा योजना से बंचित नुसरत परवीन तिरपाल में बैठी हुई ।
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गंजडुंडवारा। कस्बे और आसपास के क्षेत्र में आज भी ऐसे कई लोग हैं जो सालों से ईंटों और बांस के सहारे पालीथिन की चादर तान हर मौसम की मार से जूझ रहे हैं। इतने पैसे नहीं कि अपने लिए एक अदद मकान बनवा सकें। मेहनत मजदूरी कर तैसे-तैसे दो वक्त की रोटी का प्रबंध हो पाता है। ये लोग लोग शासन-प्रशासन की ओर टकटकी लगाए हैं। आवेदन के बाद भी अब इन्हें सरकारी आवास का लाभ नहीं मिला है।
गांव कादरगंज पुख्ता में एक जगह पर आपको कुछ पक्के मकानों के बीच ईंटों और बांस के सहारे पॉलीथिन की चादर से ढकी एक झोपड़ी नजर आएगी। इसमें रह रहे नुसरत परवीन और राणा परवीन हिचकिचाते हुए बोले कि सरकार से एक आवास की आस है। कई सालों से मौसम की मार झेल रहे हैं। खुद से इतने सक्षम नहीं कि आवास बना सकें। मेहनत मजदूरी कर बमुश्किल दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पाता है। सालों से यहीं रह रहे हैं।
गांव नेथरा में एक झोंपड़ी में रह रही हीराकली (60) के पति का देहांत 15 वर्ष पूर्व हो चुका है। एक बेटा मंद बुद्धि है। दूसरा बेटे की उम्र महज 15 साल है। परिस्थितियां ऐसी कि किताब और कलम थामने वाले ये हाथ ईंट थापने के लिए मिट्टी उठाते हैं।
गांव नवाबगंज नगरिया में एक झोंपड़ी में रह रहे रामश्री, बगवास में रह रही रानी और सिंकदरपुर वैश्य में राजवीर की हालत भी कमोबेश ऐसी ही है। इन लोगों का कहना है कि सरकारी आवास के लिए आवेदन किया है लेकिन आवास नहीं मिला।
दो वर्ष से आवास आवंटन के लिए साइट नहीं खुली है। साइट खुलते ही ऐसे जरूरतमंद लोगों को आवास आवंटित कराने की कार्रवाई की जाएगी।- चंद्रशेखर, सचिव कादरगंज पुख्ता