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किडनी रोगियों को बड़ी राहत: अस्पताल जाने का झंझट खत्म, घर पर होगी डायलिसिस; इन मरीजों के लिए निशुल्क सुविधा

Sun, 28 Sep 2025 12:42 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

डायलिसिस करा रहे किडनी रोगियों को बड़ी राहत मिली है। अब वह घर पर ही डायलिसिस करा सकेंगे। इसमें प्रकिया में मरीज में रक्त संक्रमण और शरीर में रक्त की कमी होने का खतरा नहीं रहता है। 
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किडनी रोगी की होती डायलिसिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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किडनी रोग से पीड़ित मरीज अब डायलिसिस के लिए बार-बार अस्पताल जाने के झंझट से बच सकते हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज में पेरिटोनियल डायलिसिस की सुविधा शुरू हो गई है। अभी तक तीन मरीज लाभान्वित हाे चुके हैं। असाध्य रोग और आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के लिए निशुल्क सुविधा है। अब मरीजों को लखनऊ, दिल्ली और जयपुर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि एसएन के किडनी विभाग में रोजाना 30-35 मरीजों की डायलिसिस पूरी तरह से निशुल्क हो रही है। अब यहां पर पेरिटोनियल डायलिसिस की सुविधा भी शुरू हो गई है। इसमें नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी के विशेषज्ञ डायलिसिस की प्रक्रिया कर मरीज और उनके तीमारदार को इसका प्रशिक्षण देते हैं। इसके बाद मरीज अपने घर इसे कर सकते हैं। इसमें असाध्य और आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को दवायुक्त पानी निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

 
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किडनी रोग विभाग के डाॅ. मुदित खुराना ने बताया कि अभी तक तीन मरीज ये प्रक्रिया कर चुके हैं। ये रक्त के जरिये होने वाली डायलिसिस की तरह ही कारगर है। इसमें मरीज के रक्त संक्रमण और शरीर में रक्त की कमी होने का खतरा नहीं रहता है। मरीजों को बार-आर अस्पताल आने की जरूरत भी नहीं पड़ती। एसएन में भर्ती हुए बिना ही घर पर आसानी से मरीज की डायलिसिस हो जाती है।

ऐसे होती है पेरिटोनियल डायलिसिस
किडनी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि इसमें मरीज के पेट के जरिये पेरिटोनियल कैथेटर लगाया जाता है। इसमें तैयार किया गया दवा युक्त घोल डाला जाता है। मरीज को ये दवा 5-6 घंटे तक अंदर रखनी होती है। इससे रक्त के अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकलकर घोल में मिल जाते हैं। इसके बाद इस घोल को शरीर से बाहर निकाल देते हैं। ये प्रक्रिया दिन में तीन बार करनी होती है। ये महंगी होती है, इसमें करीब औसतन 35 हजार रुपये महीने का खर्च आता है।

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