किडनी रोग विभाग के डाॅ. मुदित खुराना ने बताया कि अभी तक तीन मरीज ये प्रक्रिया कर चुके हैं। ये रक्त के जरिये होने वाली डायलिसिस की तरह ही कारगर है। इसमें मरीज के रक्त संक्रमण और शरीर में रक्त की कमी होने का खतरा नहीं रहता है। मरीजों को बार-आर अस्पताल आने की जरूरत भी नहीं पड़ती। एसएन में भर्ती हुए बिना ही घर पर आसानी से मरीज की डायलिसिस हो जाती है।
ऐसे होती है पेरिटोनियल डायलिसिस
किडनी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि इसमें मरीज के पेट के जरिये पेरिटोनियल कैथेटर लगाया जाता है। इसमें तैयार किया गया दवा युक्त घोल डाला जाता है। मरीज को ये दवा 5-6 घंटे तक अंदर रखनी होती है। इससे रक्त के अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकलकर घोल में मिल जाते हैं। इसके बाद इस घोल को शरीर से बाहर निकाल देते हैं। ये प्रक्रिया दिन में तीन बार करनी होती है। ये महंगी होती है, इसमें करीब औसतन 35 हजार रुपये महीने का खर्च आता है।
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