सोना, हीरे उगलने वाली देश की धरा बंजर होती जा रही है। रासायनिक खाद व कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग माटी को खोखला कर रहा है। उसमें पोषक तत्वों की कमी हो रही है। इस कारण उर्वरा शक्ति घट रही है। इससे उत्पादन भी घट रहा है। मिट्टी रूपी संपदा को बचाने के लिए किसान अभी जागरूक नहीं हुए हैं। जिले के सभी 15 ब्लॉकों में हुए मृदा परीक्षण में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं।
क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में हर साल सभी ब्लॉकों में मृदा की जांच की जाती है। इस साल भी परीक्षण किए गए। सबसे खराब हालात खंदौली के हैं। वहां सिर्फ आलू का उत्पादन किया जाता है।
प्रयोगशाला इंचार्ज प्रेमवीर सिंह कहते हैं कि मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की कमी हो रही है। पीएच (पोटेंशियल आफ हाइड्रोजन) बढ़ने से मृदा ऊसर हो जाएगी। आर्गेनिक कार्बन कम होगा तो उत्पादन कम होगा। इसकी वजह फसल चक्र को न अपनाना, जनसंख्या का दबाव, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का अधिक प्रयोग, जैविक खाद व पशुओं की कमी होना आदि है।
दलहन फसलों का कम होना भी उर्वरा शक्ति क्षीण होने का एक कारण है। जैविक खाद व एकीकृत तकनीकी का प्रयोग करके भी उर्वरा शक्ति को क्षीण होने से रोका जा सकता है। गोबर की खाद व हरी खाद माटी की स्थिति को सुधार सकती है।
मृदा के तत्व (2015-16) आवश्यक
पीएच 7.5-8.5 6.5-7.5
आर्गेनिक कार्बन .2-.5 .8
फास्फेट 50 प्रतिशत में निमभन (10-20)
45 प्रतिशत में मध्यम (20-40) (20-40)
पोटाश 10 प्रतिशत में कमी 250 किग्रा प्रति हेक्टेयर
सल्फर 10-15 प्रतिशत तक की कमी आ रही है
सूक्ष्म तत्व
कॉपर: 60 प्रतिशत केस में कॉपर की कमी हो रही है। कॉपर .4 से ऊपर होना चाहिए।
मैगनीज: मिट्टी में 80 प्रतिशत मैगनीज की कमी हो रही है। मैगनीज 8 से ऊपर होनी चाहिए।
जिंक: 60 प्रतिशत में कमी आ रही है। 1.2 से ऊपर होना चाहिए।
लोहा: 80 प्रतिशत केस में कमी आ रही है। 4 होना चाहिए।
2014-15
नाइट्रोजन : खेरागढ़ और सैंया में बहुत कम
फास्फेट: फतेहपुर सीकरी में मध्यम, बाकी जगह कम
पोटाश: कहीं कमी नहीं है
जिंक: बाह में कमी है, बाकी सबमें खत्म हो गई
मैगनीज: सैंया, पिनाहट में ज्यादा कमी है
लोहा: सभी ब्लॉकों में कम है
कॉपर: सभी जगह पर्याप्त है
सल्फर: सभी जगह कम है
2013-14 की स्थिति
नाइट्रोजन: अछनेरा, खेरागढ़, जगनेर, सैंया में बहुत कम
फास्फेट: 15 ब्लॉकों में कम
जिंक: खंदौली, जगनेर, शमसाबाद, बाह में मध्यम, जैतपुर में कमी
मैगनीज: खंदौली, जगनेर, शमसाबाद, बाह में कमी
लोहा: बरौली अहीर, अकोला, अछनेरा, फतेहपुर सीकरी, एत्मादपुर, शमसाबाद, बाह में कमी है
कॉपर: बिचपुरी में कमी, बाकी जगह पर्याप्त
सल्फर: पिनाहट में कमी, बिचपुरी, बरौली अहीर, अकोला, अछनेरा, एत्मादपुर, खेरागढ़, जगनेर, फतेहाबाद, शमसाबाद, बाह, जैतपुरकलां में भी जरूरत