एएसआई के दो निदेशकों ने दक्षिणी गेट पर प्रस्तावित कार्यों की ड्राइंग देखी
कोवल की जगह रेड स्टोन के उपयोग के लिए मांगी मजबूती की जांच रिपोर्ट
197 करोड़ रुपये के मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘ताजगंज प्रोजेक्ट’ में अब कोवल स्टोन नहीं लगाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद एएसआई अधिकारियों की टीम ने ग्रेनाइट की जगह लाल पत्थर का उपयोग करने की सलाह दी है। गुुरुवार को एएसआई के दो डायरेक्टर ताजगंज प्रोजेक्ट के तहत हो रहे काम को देखने पहुंचे। ताजमहल, ताजगंज दक्षिणी गेट का निरीक्षण करने के बाद एएसआई निदेशकों ने रेड स्टोन की जांच रिपोर्ट के साथ कई ड्राइंग भी मांगी।
ताजमहल के 500 मीटर के अंदर ग्रेनाइट की सड़क बनाने के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद गेंद पूरी तरह से एएसआई के पाले में है। एएसआई को सुप्रीम कोर्ट में आगामी सुनवाई पर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। एएसआई निदेशक संरक्षण टीजे अलोने और निदेशक स्मारक जाह्नवीज शर्मा अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम के साथ ताजमहल पहुंचे। उन्होने दक्षिणी और पूर्वी गेट का निरीक्षण किया। एएसआई ने ताजमहल में ग्रेनाइट का उपयोग न करने की सलाह दी है। राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट इंजीनियर दिलीप सिंह ने एएसआई अधिकारियों को दक्षिणी गेट पर प्रस्तावित संपवैल के बारे में बताया। कुत्ता पार्क में 6.5 मीटर गहरा संपवैल प्रस्तावित है, जहां चारों कटरों और साउथ गेट का पानी आएगा, जिसे लिफ्ट कर पूर्वी गेट नाले में डाला जाएगा। इससे दक्षिणी गेट पर जलभराव की समस्या खत्म हो जाएगी। यह संपवैल ताज से 105 मीटर दूर है, लेकिन कटरों से महज 10 मीटर दूरी है, जबकि स्मारक से 100 मीटर तक कोई निर्माण संभव नहीं। एएसआई निदेशकों ने ताजगंज में लग रहे स्टोन लैंप पोस्ट के डिजायन पर भी आपत्ति उठाई और इसे मुगलिया पैटर्न पर बनाने की सलाह दी। एएसआई अधिकारी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेंगे, जिसके बाद ही ताजगंज प्रोजेक्ट में काम शुरू होगा।
ताज सहित किसी स्मारक में नहीं लगा ग्रेनाइट
ताजमहल में कहीं भी ग्रेनाइट का उपयोग नहीं किया गया, जबकि रेड सैंड स्टोन का प्रयोग मस्जिद, मेहमानखाना, मुख्य प्रवेश द्वार, जलमहल, पाथवे और कटरों में किया गया है। नेशनल मान्यूमेंट अथारिटी की बैठक में ही एएसआई निदेशकों ने साफ कर दिया था कि ताजमहल की वास्तुकला से ग्रेनाइट मैच नहीं करता, ऐसे में वह अपना विकल्प तैयार रखें। एएसआई निदेशक ने यूपी टूरिज्म और निर्माण निगम से कहा कि जोधपुर में लाल पत्थर की सड़क है, जिसे कोवल की तरह ही लगाया गया है। आगरा में फतेहपुर सीकरी पैटर्न की तरह से रेड सैंड स्टोन लगाया जा सकता है। 17 जनवरी को आईआईटी रुड़की रेड स्टोन की मजबूती की जांच कर रिपोर्ट देगा, उसके बाद डिजायन तैयार होंगे।
ताजगंज प्रोजेक्ट में एएसआई जो सुझाव देगा, वही काम ताजमहल की 500 मीटर परिधि में कराया जाएगा। उनके सुझावों के मुताबिक प्रोजेक्ट में बदलाव किए जाएंगे
दिनेश कुमार
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी