टूंडला। होली पर महंगाई की मार साफ तौर पर दिखाई दे रही है। होली में अब मात्र सात दिन शेष रह गए हैं, किंतु बाजारों में होली की सुगबुआहट नजर नहीं आ रही है। जबकि पूर्व में इस दौरान तक बाजार पिचकारियों, रंग-गुलालों व चिप्स-पापड़ आदि की दुकानों से सज जाया करते थे और बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ने लगती थी। फिलहाल बाजरों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
इसे महंगाई का असर ही कहा जाएगा, जब होली जैसे महापर्व के सात दिन शेष रहते हुए भी बाजारों में होली जैसी कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। महंगाई के इस दौर में जहां आम लोग अभी इस त्योहार अभी उत्सुक नहीं हैं, वहीं दुकानदार भी शायद अभी रुचि नहीं ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि अब से पूर्व बाजारों में एक माह पूर्व से तरह-तरह की पिचकारियों, होली की रंगबिरंगी टोपियों, रंग-गुलालों व अन्य खाद्य सामग्रियों से सजने वाली दुकानें अभी तक नदारत हैं।
इस संदर्भ में पिचकारियों की सबसे बड़ी दुकानदार सजाने वाले दुकानदार समीउज्जमा कुरैशी का कहना है कि बाजार एकदम ठंडा पड़ा हुआ है। अभी पिचकारियों की मांग नहीं हो रही है, हालांकि माल आ गया है। वे एक दो दिन में फिर से दुकान सजायेंगे। वहीं परचून के बड़े विक्रेता सुरेश श्रोत्रिय व राकेश जैन, राजीव वार्ष्णेय का कहना है कि अभी साहलग व आलू खुदाई की बजह से होली की ओर ग्राहकों का ध्यान उधर बंटा हुआ है।
मंगलवार को साहलग समाप्त होते ही होली के सामानों की बिक्री बढ़ जाएगी। दैनिक मजदूरी करने वाले सूखा, रामनरेश आदि का कहना था कि इस मंहगाई के दौर में पर्व है तो मनाएंगे, किंतु पर्व की भांति मनाना अब नामुमकिन है। पर्व से दो दिन पूर्व ही खरीदारी करेंगे, जिससे पर्व भी मन जाए और अतिरिक्त भार न पड़े।