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मथुरा होली 2022: टेसू के फूलों से बने रंगों से होली खेलेंगे बांकेबिहारी, जानें किस तरह तैयार हो रहा ये खास रंग

Fri, 04 Mar 2022 08:26 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

 ब्रज की होली में टेसू के रंगों का विशिष्ट स्थान है। रंग बनाने के लिए दो सौ किलो टेसू के फूल मंगाए गए हैं। इसके साथ ही सात रंग के पांच सौ किलो गुलाल की भी व्यवस्था की जा रही है।
 
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श्रीबांकेबिहारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ब्रज के मंदिरों में होली की अनूठी परंपरा है। इसके अनुरूप ही खास इंतजाम भी किए जाते हैं। होली पर मंदिरों में फूलों से तैयार रंगों की बरसात होगी। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में होली आयोजन के लिए दो सौ किलो टेसू के फूल मंगाए गए हैं। इनसे रंग तैयार होगा। इसके अलावा लगभग पांच सौ किलो सात रंग का गुलाल भी मंगाया जाएगा। इस रंग में केसर, गुलाब जल की महक श्रद्धालुओं को आनंदित कर देगी। ब्रज की होली में टेसू के रंगों का विशिष्ट स्थान है। टेसू के फूलों से तैयार प्राकृतिक रंग शुद्धता का भी प्रतीक है।
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रंगभरनी एकादशी से होगा होली महोत्सव शुरू 

ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के सेवायत श्रीनाथ गोस्वामी ने बताया कि वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में रंगभरनी एकादशी से होली महोत्सव का परंपरागत शुभारंभ होता है। रंग भरनी एकादशी पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज अपने निज महल से बाहर जगमोहन में आकर भक्तों के साथ होली खेलते हैं। नगर के मंदिरों में टेसू के फूलों से ही होली खेली जाती है। 

कोलकाता से मंगाए गए फूल

हरगूलाल की हवेली की ओर से विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में कोलकाता से टेसू, गेंदा, मोंगरा, मारकेट, पीला और सफेद गुलाब सहित करीब एक हजार किलो फूल मंगाए गए हैं। इनमें टेसू के फूल दो सौ किलो हैं। इन फूलों की पंखुड़ियों को पानी में उबालकर, इस पानी को छानकर ड्रम में भर दिया जाता है। इसमें गुलाब जल, चंदन, केसर को मिलाकर सेवायत स्वर्ण-रजत पिचकारियों से भक्तों पर रंग डालते हैं। वहीं अबीर-गुलाल, कुमकुम भी भक्तों पर डाला जाता है।

इस तरह तैयार होता है रंग 

ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के पास हरगूलाल की हवेली के सुपरवाइजर ठाकुर महाराम सिंह ने बताया कि इन टेसू के फूलों को मंदिर प्रांगण में स्थित रसोई में दो बड़ी कड़ाही में पहले उबाला जाता है। इसके बाद इन्हें छानकर दो ड्रमों में मंदिर भेजा दिया जाता है। टेसू के फूलों से बने होली के रंग तैयार कर रंग भरनी एकादशी पर भक्तों पर डाला जाता है। उन्होंने बताया कि शनिवार से मंदिर की रसोई में प्राकृतिक रंग बनाए जाने का काम शुरू होगा और 13 फरवरी की शाम तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके अगले दिन 14 फरवरी को रंगभरनी एकादशी पर भक्तों पर टेसू के रंगों के साथ गुलाल की बैछार की जाएगी।

इन मंदिरों में होगा टेसू के फूलों के रंगों का प्रयोग

ठाकुर राधावल्लभ, राधारमण मंदिर, राधास्नेह बिहारी, राधा दामोदर, राधाश्याम सुंदर, जशोदानंदन धाम, राधा गोपीनाथ, मदन मोहन मंदिर, गोदाहरिदेव दिव्य देश आदि मंदिरों में टेसू के फूलों से बने रंगों का प्रयोग किया जाता है। 

टेसू के रंग पर चढ़ा महंगाई का रंग 

इस बार टेसू के फूलों पर महंगाई का रंग चढ़ा हुआ है। पिछले वर्ष 80 रुपये प्रति किलो के टेसू के फूल इस बार 100 रुपये प्रति किलो के भाव से खरीदे जा रहे हैं।
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