समलैंगिक संबंधों से एचआईवी से ग्रसित हुए मरीजों में युवाओं की संख्या अधिक है, इनमें 25 से 35 साल के सबसे ज्यादा मरीज हैं और इनमें उच्च शिक्षित भी हैं। संक्रमित सुई से एचआईवी का शिकार बनने वालों में अधिकांश नशे के आदी मिले, जो नशे के लिए एक ही इंजेक्शन का कई लोग या बार-बार इस्तेमाल करते थे।
चिकित्सकों से परामर्श लें, झिझकें नहीं
एआरटी सेंटर की काउंसलर शीतल तोमर ने कहा कि सावधानी और जागरूकता ही इस बीमारी से बचने का सबसे सरल इलाज है। एसएन के एआरटी सेंटर में काउंसलर और जांच की सुविधा है। बिना झिझके परामर्श लें। मरीजों की काउंसिलिंग के साथ इलाज भी दिया जाता है।
केस एक:
सदर क्षेत्र में 32 साल का युवक इवेंट कंपनी चलाता है। समलैंगिक है और जब इसकी तबियत खराब रहने लगी तो एसएन में जांच कराई तो एचआईवी की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने इसकी काउंसिलिंग की और अभी इलाज चल रहा है।
केस दो:
लोहामंडी क्षेत्र में 41 साल का व्यक्ति नशे का आदी है, यह इंजेक्शन लगाकर नशा करता है। कमजोरी और परेशानी होने पर जांच में बीमारी मिली। इसके एक और साथी में भी एचआईवी की पुष्टि हुई। दोनों साथ में एक ही सुई से नशा करते थे।
| एचआईवी मरीज |
2020-21 |
2015-16 |
| कुल पंजीकरण |
10570 |
5978 |
| सक्रिय मरीज |
4381 |
2916 |
| असुरक्षित यौन संबंध |
5690 |
2916 |
| संक्रमित रक्त |
476 |
189 |
| समलैंगिक |
153 |
59 |
| संक्रमित सुई |
331 |
161 |