ताजमहल में होने वाले तीन दिवसीय उर्स को बंद कराने की मांग
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ताजमहल में आगामी 15, 16 और 17 जनवरी को होने वाले उर्स को लेकर विवाद गहरा गया है। अखिल भारत हिंदू महासभा ने इस आयोजन को नियमों के विरुद्ध बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है। सोमवार को संगठन के पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला
ज्ञापन में कहा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने केवल ताजगंज क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी है। इसके अलावा किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि जैसे उर्स, कव्वाली या चादरपोशी पर पूर्ण रूप से रोक है। महासभा ने तर्क दिया कि जब न्यायालय की अनुमति नहीं है, तो तीन दिनों के लिए प्रवेश नि:शुल्क कर उर्स का आयोजन करना नियमों का उल्लंघन है।
आरटीआई और कोर्ट केस का जिक्र
हिंदू महासभा के पदाधिकारियों ने बताया कि राजकुमार राजे द्वारा मांगी गई जानकारी में जन सूचना में विभाग ने स्वीकार किया है कि ताजमहल में नमाज या उर्स की अनुमति से संबंधित मुगलकालीन या ब्रिटिशकालीन कोई लिखित आदेश उनके पास उपलब्ध नहीं है।
न्यायालय में मामला
आगरा के सिविल कोर्ट (सीनियर डिवीजन) में बाद संख्या 63/2024 लंबित है, जिसमें उर्स को रोकने की मांग की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई भी 15 जनवरी 2026 को होनी तय है।
युवा पदाधिकारियों ने किया नेतृत्व
ज्ञापन सौंपने के दौरान युवा मंडल अध्यक्ष विपिन राठौर और मंडल अध्यक्ष मनीष पंडित ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रशासन को न्यायालय की अवमानना से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिना किसी वैध आदेश के उर्स का आयोजन किया गया, तो यह नियमों के विरुद्ध होगा। संगठन ने मांग की है कि ताजमहल के अंदर किसी भी प्रकार की नई धार्मिक परंपरा को बढ़ावा न दिया जाए। इस दौरान भारी संख्या में संगठन के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।