कुछ लोगों ने दूसरे विषयों को अपना लक्ष्य बनाया। संबंधित विषय उनकी जीविकोपार्जन के साधन भी बने, लेकिन आज भी समाज में उनकी पहचान हिंदी से ही है। अंग्रेजी, विज्ञान से मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद लोग हिंदी साहित्य को अपनी पहचान बताते हैं। उनका मानना है कि हिंदी प्रेम और रस की भाषा है। इससे अच्छी भाषा दूसरी ओर कोई नहीं है।
अंग्रेजी से हासिल की मास्टर डिग्री, बांट रहे हिंदी साहित्य का ज्ञान
बेसिक में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत गोविंद सिंह ने एमए अंग्रेजी से की। अंग्रेजी साहित्य का भी अध्ययन किया। इसके बाद भी हिंदी ने उन्हें सामाजिक क्षेत्र में पहचान दिलाई।
उनका कहना है कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो पहचान बनाने में बड़ा सहयोग करती है। हिंदी साहित्य किसी भी हृदय पर प्रभाव जमा सकता है। वह स्कूल में जहां बच्चों को उनके विषयों का ज्ञान दे रहे हैं, वे हिंदी में काव्यपाठ करके ख्याति प्राप्त की है।