अजय मिश्र, अखिलेश सक्सेना बाएं से दाएं
- फोटो : अमर उजाला
हिंदी भाषा बोलने में जितनी मधुर है उसी तरह भावनाओं के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। नई पीढ़ी का प्रेम इस भाषा से बढ़ता ही जा रहा है। भावनाओं की इस भाषा को इसी तरह से सम्मान मिलता रहना चाहिए। व्हाट्सएप संवाद पर हिंदी प्रेमियों ने इस भाषा को भावनाओं और रोजगार की भाषा बताया है।
हिंदी भाषा का अभिनंदन है। इस भाषा पर हमें मान है, यह भाषा भावनाओं की भाषा है। पूजनीय भाषा के साथ-साथ यह प्यार की भाषा है। इसने लोगों को रोजगार दिया है। नई पीढ़ी इस भाषा से जुड़कर स्वयं तो ऊंचाईयों तक पहुंचने का प्रयास कर ही रही है। बल्कि भाषा को भी नित नया सम्मान दे रही है।
- विपिन शर्मा, हिंदी प्रेमी।
साहित्य और काव्य ने सदैव ही हिंदी को सम्मान दिया है। काव्य के क्षेत्र में हिंदी ने लोगों को ऊंचाईयों तक पहुंचाया। जहां एक ओर हिंदी भाषा ने विश्व पटल पर पहचान बनाई वहीं काव्य के क्षेत्र में भी इस भाषा ने तमाम लोगों को रोजगार से जोड़ दिया।
- अखिलेश सक्सेना, कवि।
डॉ. अनुश्वेता सिंह, प्रधानाध्यापिका, विपिन शर्मा, हिंदी प्रेमी
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नई शिक्षा नीति में मिलेगा हिंदी को बढ़ावा
देश में प्रस्तावित नई शिक्षा नीति में भी हिंदी भाषा को बढ़ावा मिलेगा। इससे अभिभावकों में प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी भाषा एवं अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की होड़ खत्म होगी। साथ ही बच्चों में विषय को समझने की प्रवृति बढ़ेगी और रटने की आदत खत्म होगी। जो उच्च शिक्षा तक बौद्धिक विकास में सहायक होगी। - अजय मिश्र, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बनी अलीगंज
संचार और व्यवसाय की भाषा बनी
हिंदी का उद्भव देवभाषा संस्कृत से हुआ है। इसकी विशेषताएं इसे अन्य भाषाओं से अलग एवं खास बनाती हैं। दुनिया में हिंदी एक मात्र ऐसी भाषा है, जिसके शब्दों, उच्चारण, हावभाव एवं अभिव्यक्ति में एकरूपता है। कभी साहित्य संस्कृति तक सीमित रहने वाली हिंदी आज विज्ञान, तकनीक संचार एवं व्यवसाय की भाषा बन चुकी है। -डॉ. अनुश्वेता सिंह, प्रधानाध्यापिका