मैनपुरी। इटावा-मैनपुरी स्टेट हाईवे पर वाहनों के लिए 80 की रफ्तार निर्धारित की गई है। लेकिन यहां पर व्यवस्थाएं 40 की गति के लिए भी नहीं हैं। हालांकि यहां पर रफ्तार का निर्धारण करने से पूर्व इसके लिए व्यवस्थाएं भी कराई गई थीं। कटीले तार आदि भी लगाए गए थे। अब सब कुछ बदहाल हो चुके है। प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
इटावा-मैनपुरी स्टेट हाईवे 83 पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाने की अनुमति है। जबकि जिले की अन्य सड़कों पर 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वाहनों को दौड़ाए जाने की अनुमति है। दोगुनी गति निर्धारण से पहले इस हाईवे पर सड़क के दोनों तरफ पांच फीट ऊंची कटीले तारों की बाड़ लगाई गई थी।
इससे खेतों से अचानक जानवर या किसी व्यक्ति के आने की आशंका शून्य थी। इससे हादसे भी कम होने की उम्मीद थी। धीरे-धीरे ये तार गायब हो गया। कहीं ये तार चोरी हो गया तो कहीं दुर्घटनाओं में टूटने के बाद इसे सही नहीं कराया गया। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। वाहन उसी गति से फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं।
नौ महीने में 60 से अधिक हुए हादसे
मैनपुरी-इटावा हाईवे पर बीते नौ महीनों में 60 से अधिक प्रमुख सड़क हादसे हुए। इनमें करीब 20 लोगों की मौत हो गई, साथ ही 150 से अधिक लोग घायल हो गए। वर्ष 2018 में कीरतपुर के पास बस पलटने से 17 लोगों की मौत हुई थी। 30 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
करहल थाने के सामने हाईवे पर ही खड़े किए वाहन
एक ओर गति सीमा के अनुसार की गईं व्यवस्थाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं तो वहीं सरकारी तंत्र भी मुश्किल बना हुआ है। करहल थाने के सामने फोरलेन हाईवे सिंगल रोड बन गया है। यहां हाईवे पर ही पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त और सीज किए गए वाहनों को खड़ा करा दिया है। उच्चाधिकारी भी यहां से गुजरते हैं, लेकिन उन्होंने भी आज तक इसका ध्यान नहीं दिया।
नीलगाय से होते हैं सर्वाधिक हादसे
हाईवे पर नीलगाय से सर्वाधिक हादसे होते हैं। दरअसल तेज रफ्तार वाहन के सामने अचानक खेतों से नीलगाय निकलकर आ जाते हैं। नीलगाय की टक्कर से दुर्घटनाएं होती हैं। कई लोग इन दुर्घटनाओं में अपनी जान भी गवां चुके हैं।